Wednesday, September 9

गिरिडीह/रांची। झारखंड की राजनीति के लिए 6 सितंबर 2026 की सुबह एक गहरे सदमे के रूप में आई। राज्य सरकार में मंत्री और गिरिडीह के विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का हृदयाघात से आकस्मिक निधन हो गया। शनिवार देर रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी, जिसके बाद परिजन उन्हें गिरिडीह के मर्सी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। वे महज 56 वर्ष के थे।

उनके निधन की खबर फैलते ही गिरिडीह से लेकर रांची तक शोक की लहर दौड़ गई। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने सोशल मीडिया पर भावुक शब्दों में उन्हें विदाई दी, तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें अपने बड़े भाई जैसा बताते हुए कहा कि उनके जाने से एक ऐसी रिक्तता पैदा हुई है जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। पार्थिव देह को अंतिम दर्शन के लिए झामुमो जिला कार्यालय और फिर उनके हरसिंगरायडीह स्थित आवास ले जाया गया, जहां हजारों लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े।

संयोग से यह झारखंड की मौजूदा हेमंत सोरेन सरकार में बीते कुछ समय में शिक्षा से जुड़े विभाग संभालने वाले तीसरे नेता का निधन है — इससे पहले जगरनाथ महतो और फिर अगस्त 2025 में शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन का भी निधन हो चुका है।

आंदोलन की आग में तपा एक जीवन

सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक जीवन झारखंड अलग राज्य आंदोलन की कोख से निकला था। 1989 में दिशोम गुरु शिबू सोरेन के मार्गदर्शन में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और राज्य की अस्मिता, पहचान व अधिकारों की लड़ाई में खुद को झोंक दिया। आंदोलन के दौर में उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा और दर्जनों मुकदमों का सामना करना पड़ा, लेकिन झारखंडी अस्मिता और जनहित के मुद्दों पर उन्होंने कभी समझौता नहीं किया।

संगठन में उन्होंने नगर अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष और बीस सूत्री उपाध्यक्ष जैसे पदों पर जमीनी स्तर से काम किया। इसी संघर्ष और संगठनात्मक मेहनत का नतीजा था कि उन्होंने 2019 में पहली बार और 2024 में दूसरी बार गिरिडीह विधानसभा सीट से झामुमो के टिकट पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। हेमंत सोरेन सरकार में उन्हें नगर विकास, आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद, युवा कार्य और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई — और अल्प समय में ही उन्होंने विकास का ऐसा खाका खींचा जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हुई।

पर्यटन और खेल को दी नई उड़ान

पर्यटन मंत्री के रूप में सुदिव्य कुमार सोनू का लक्ष्य झारखंड की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर को देश-दुनिया के सामने लाना था।

  • पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर: नेतरहाट, रजरप्पा और पंचघाघ में ‘ग्लास स्काईवॉक’ के निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना उनकी पहल का हिस्सा थी।
  • इको व फॉरेस्ट टूरिज्म: उन्होंने कर्नाटक जाकर ‘जंगल लॉज एंड रिसॉर्ट्स’ मॉडल का अध्ययन किया और राज्य के वनों तथा वन्यजीवों को सहेजते हुए टूरिज्म पार्टनरशिप को आगे बढ़ाने की कोशिश की।
  • स्थानीय रोजगार व पर्यटन सर्किट: ग्रामीणों की आय बढ़ाने के लिए ‘होमस्टे पॉलिसी’ की नींव रखी और ‘नेतरहाट उत्सव’, माइंस टूरिज्म तथा ट्राइबल टूरिज्म सर्किट की रूपरेखा तैयार कर राज्य को नई पहचान दिलाने का प्रयास किया।
  • धार्मिक व प्राकृतिक स्थलों का कायाकल्प: पेरवांघाघ जलप्रपात और कौलेश्वरी पर्वत पर रोपवे परियोजनाओं को गति देने के लिए वे खुद स्थलों का दौरा करते रहे।

खेल के क्षेत्र में उन्होंने ग्रामीण व आदिवासी प्रतिभाओं, विशेषकर हॉकी और एथलेटिक्स, को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच दिलाने के लिए खेल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने पर जोर दिया और पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी जैसे दिग्गजों से भी इस सिलसिले में संवाद स्थापित किया।

गिरिडीह को बनाया आत्मनिर्भर और हरित शहर

अपने गृह क्षेत्र गिरिडीह को आधुनिक, आत्मनिर्भर और हरित शहर बनाना उनका सबसे बड़ा सपना था, जिसे उन्होंने काफी हद तक धरातल पर उतारा:

  • शिक्षा का हब: गिरिडीह में यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, नए स्वरूप में महिला महाविद्यालय, जेसी बोस सीएम एक्सीलेंस स्कूल, पचम्बा सीएम एक्सीलेंस स्कूल और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय का निर्माण करवाया।
  • इको व ग्रीन इनिशिएटिव: गिरिडीह को झारखंड का पहला ‘सोलर सिटी’ बनाने का श्रेय उन्हें जाता है। इसके साथ ही उन्होंने चिड़ियाघर, बायोडायवर्सिटी पार्क, आधुनिक लाइब्रेरी और प्रसिद्ध खंडोली वाटरफॉल के सौंदर्यीकरण को भी आगे बढ़ाया।
  • कृषि, उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर: किसानों और पशुपालकों के लिए 50 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाली ‘मेधा डेयरी परियोजना’ और पीरटांड़ में ‘मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजना’ की सौगात दी। शहर के यातायात को सुगम बनाने के लिए फोरलेन सड़क, बायपास और उसरी नदी किनारे शास्त्री नगर से अरगाघाट तक भव्य ‘मरीन ड्राइव’ का निर्माण भी उनकी उपलब्धियों में शुमार है।

एक अधूरी विरासत, एक स्थायी प्रेरणा

एक जुझारू आंदोलनकारी से लेकर एक कुशल नीति-निर्माता और जनप्रिय मंत्री बनने तक का सफर तय करने वाले सुदिव्य कुमार सोनू का निधन ऐसे समय हुआ है जब वे सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। उनका जाना झारखंड की राजनीति के लिए एक ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी। उनके द्वारा शुरू की गई विकास परियोजनाएं — चाहे वह गिरिडीह का सोलर सिटी मॉडल हो या राज्य की पर्यटन नीति — आने वाले वर्षों में उनके कार्यों की गवाही देती रहेंगी।

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