गिरिडीह: क्या अब अपने ही मोहल्ले में दोस्तों के साथ बाइक पर बैठकर बातचीत करना भी किसी युवक के लिए भारी पड़ सकता है? गिरिडीह के नगर थाना क्षेत्र से सामने आया एक मामला पुलिस की कार्यशैली पर यह सवाल खड़ा कर रहा है। 25 वर्षीय लखन साव ने नगर थाना की पेट्रोलिंग पुलिस पर उसके साथ मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया है।
लखन का कहना है कि वह अपने मोहल्ले में दोस्तों के साथ बाइक पर बैठकर बातचीत कर रहा था। इसी दौरान नगर थाना की पेट्रोलिंग पुलिस वहां पहुंची और उसके साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसकी बाइक भी उठाकर थाना ले गई।
मामला यहीं नहीं रुका। लखन जब बाद में अपने भाई के साथ बाइक के संबंध में जानकारी लेने नगर थाना पहुंचा, तो उसके भाई के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है। घटना के बाद लखन की तबीयत बिगड़ गई और उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
दोस्तों के साथ बैठकर कर रहे थे बातचीत, तभी पहुंची पेट्रोलिंग पुलिस
घायल लखन साव मुफस्सिल थाना क्षेत्र के झगरी निवासी मुन्ना साव का बेटा है। लखन के मुताबिक, वह अपने मोहल्ले में कुछ दोस्तों के साथ बाइक पर बैठा था और आपस में बातचीत कर रहा था।
इसी दौरान नगर थाना की पेट्रोलिंग पुलिस वहां पहुंची। लखन का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने वहां पहुंचते ही उसके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और इसके बाद मारपीट शुरू कर दी।
लखन के मुताबिक, उसे बेरहमी से पीटा गया और उसकी बाइक को भी पुलिस अपने साथ नगर थाना ले गई।
यहां सवाल यह है कि अगर किसी स्थान पर लोगों के खड़े होने या बैठने को लेकर पुलिस को कोई आपत्ति थी, तो क्या कानून के तहत पूछताछ या कार्रवाई का कोई दूसरा रास्ता नहीं था? आखिर बातचीत कर रहे एक युवक के साथ मारपीट की नौबत क्यों आई?
बाइक लेने भाई के साथ थाना पहुंचा तो वहां भी मारपीट का आरोप
लखन ने घटना की जानकारी अपने परिवार और भाई को दी। इसके बाद वह अपने भाई के साथ नगर थाना पहुंचा।
लखन का आरोप है कि बाइक के संबंध में पूछताछ करने थाना पहुंचे उसके भाई के साथ भी पुलिसकर्मियों ने मारपीट की। यानी जिस विवाद की शुरुआत सड़क पर हुई, उसका असर थाना परिसर तक पहुंच गया।
आरोप है कि थाना परिसर में मौजूद पुलिसकर्मियों ने लखन के साथ भी दोबारा मारपीट की। इसी दौरान उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह थाना परिसर में ही गिर पड़ा।
तबीयत बिगड़ी तो पुलिसकर्मी ही लेकर पहुंचे अस्पताल
थाना परिसर में युवक की तबीयत बिगड़ने के बाद पुलिसकर्मी उसे सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी स्थिति को देखते हुए उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया।
परिजनों के मुताबिक, लखन के शरीर पर कई जगह चोट के निशान हैं और उसका इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद लखन की बड़ी बहन भी अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने पूरे मामले पर नाराजगी जताते हुए जांच की मांग की और आरोप लगाया कि अगर उनके भाई से कोई गलती हुई थी, तो पुलिस को कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करनी चाहिए थी, मारपीट नहीं।
पुलिस और पेट्रोलिंग टीम की भाषा पर भी उठता सवाल
इस घटना में सिर्फ मारपीट का आरोप ही सवालों के घेरे में नहीं है, बल्कि पुलिस और पेट्रोलिंग टीम के व्यवहार और भाषा के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
लखन का आरोप है कि उसके साथ मारपीट से पहले पुलिसकर्मियों ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। आम लोगों से पुलिस की बातचीत में भाषा और व्यवहार कैसा होना चाहिए, यह भी कानून-व्यवस्था की कार्यशैली का अहम हिस्सा है।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या पेट्रोलिंग के दौरान अभद्र भाषा और सख्ती को ही कार्रवाई का तरीका बना लिया गया है? क्या किसी युवक को रोकना हो तो पहले उससे बात नहीं की जा सकती? और अगर पुलिस को किसी गतिविधि पर संदेह था, तो क्या बिना मारपीट के स्थिति को संभालना संभव नहीं था?
पुलिस का दावा- वहां अक्सर जुटते हैं लोग, नशे की भी शिकायत
हालांकि, नगर थाना प्रभारी रतन कुमार सिंह ने पुलिस पर लगाए गए मारपीट के आरोपों से अलग घटनाक्रम बताया है।
उनका कहना है कि जिस जगह युवक और उसके साथी खड़े थे, वहां अक्सर लोगों के जुटने और नशे का सेवन करने की शिकायत मिलती रहती है। पेट्रोलिंग पुलिस के वहां पहुंचने पर मौजूद लोग भागने लगे और इसी दौरान युवक की बाइक और मोबाइल मौके पर छूट गए, जिन्हें पुलिस ने जब्त कर थाना लाया।
थाना प्रभारी के अनुसार, बाद में लखन अपने साथियों और परिजनों के साथ नगर थाना पहुंचा और वहां हंगामा करने लगा। उन्होंने दावा किया कि युवक खुद भी डेंड्राइट के नशे में था और थाना परिसर में गाली-गलौज करते हुए आपत्तिजनक बातें कर रहा था।
पुलिस ने युवक के साथ मारपीट किए जाने के आरोप से इनकार किया है।
आरोप सही या पुलिस का पक्ष? जांच से साफ होगी तस्वीर
एक तरफ युवक और उसके परिजन पुलिस पर सड़क से लेकर थाना परिसर तक मारपीट करने का आरोप लगा रहे हैं। दूसरी तरफ पुलिस का कहना है कि युवक और उसके साथी ऐसे स्थान पर जुटे थे, जहां नशे के सेवन की शिकायत रहती है, और पुलिस ने युवक के साथ मारपीट नहीं की।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उस दिन नगर थाना परिसर में हुआ क्या था?
अगर युवक के साथ मारपीट नहीं हुई, तो उसकी तबीयत थाना परिसर में अचानक क्यों बिगड़ी? अगर पुलिस ने सिर्फ कार्रवाई की थी, तो क्या उस कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया और उसके दौरान हुए व्यवहार की जांच होनी चाहिए? और अगर युवक या उसके साथी किसी गलत गतिविधि में शामिल थे, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाने के बजाय मारपीट के आरोप क्यों सामने आए?
इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच से ही मिल सकता है। खासकर तब, जब थाना परिसर का बताया जा रहा वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
फिलहाल लखन साव सदर अस्पताल में इलाजरत है। युवक के आरोप, पुलिस का पक्ष और सामने आया वीडियो-तीनों को साथ रखकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर विवाद की शुरुआत कैसे हुई और थाना परिसर तक पहुंचने के बाद घटनाक्रम किस तरह बिगड़ा।
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