Wednesday, October 14

बैंकिंग सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए बड़ी खबर है। हर शनिवार छुट्टी और सप्ताह में पांच दिन कामकाज की मांग को लेकर बैंक कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। मांग पूरी नहीं होने पर देशभर के बैंक कर्मचारी चरणबद्ध आंदोलन के बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दे चुके हैं।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने लंबित मांगों को लेकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। संगठन के मुताबिक आंदोलन की शुरुआत 11 सितंबर 2026 की देशव्यापी हड़ताल से होगी। इसके बाद 28 से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय हड़ताल और मांगों पर समाधान नहीं होने की स्थिति में 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल का प्रस्ताव है।

क्यों नाराज हैं बैंक कर्मचारी?

बैंक कर्मचारी संगठनों का कहना है कि कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं। इनमें सबसे प्रमुख मांग है सभी शनिवार को बैंक अवकाश घोषित करना।

फिलहाल बैंकों में केवल दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी होती है। कर्मचारी संगठन लंबे समय से पांच दिन के कार्य सप्ताह की मांग कर रहे हैं।

इसके अलावा वरिष्ठ बैंक अधिकारियों के लिए कार्य-आधारित प्रोत्साहन योजना और पेंशन से जुड़े मुद्दे भी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं।

दो साल पहले बनी थी बात, फिर भी फैसला क्यों नहीं?

पांच दिन के कार्य सप्ताह को लेकर बैंक कर्मचारी संगठनों और भारतीय बैंक संघ (IBA) के बीच पहले ही सहमति बन चुकी है।

7 दिसंबर 2023 को हुए समझौते में सभी शनिवार को अवकाश देने की सिफारिश की गई थी। इसके बाद 8 मार्च 2024 को हुए 12वें द्विपक्षीय वेतन समझौते में भी इस प्रस्ताव को शामिल किया गया।

समझौते के अनुसार, प्रस्ताव को लागू करने के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी है। इसके तहत सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना के कामकाज के समय में करीब 40 मिनट की बढ़ोतरी की जानी थी।

लेकिन करीब दो साल बीत जाने के बाद भी इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया है।

8 लाख बैंक कर्मचारी हो सकते हैं आंदोलन में शामिल

बैंक यूनियनों के मुताबिक देशभर में करीब 8 लाख बैंक कर्मचारी और अधिकारी इस आंदोलन से प्रभावित हो सकते हैं।

अगर चरणबद्ध आंदोलन के बावजूद सरकार और बैंक संगठनों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो 26 अक्टूबर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल बैंकिंग सेवाओं पर बड़ा असर डाल सकती है।

वेतन समझौते में भी हुआ था बड़ा बदलाव

बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए 12वां द्विपक्षीय समझौता और 9वां संयुक्त समझौता 8 मार्च 2024 को हुआ था। यह समझौता नवंबर 2022 से पांच वर्षों के लिए लागू हुआ।

इसमें वेतन और भत्तों में करीब 17 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान किया गया था। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर इसका अनुमानित वार्षिक अतिरिक्त खर्च करीब 12,449 करोड़ रुपये बताया गया था।

अब कर्मचारियों का कहना है कि जब वेतन समझौते से जुड़े प्रावधानों पर सहमति बन चुकी है, तो पांच दिन के कार्य सप्ताह जैसे मुद्दे को भी लंबे समय तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।

अब देखना यह होगा कि 26 अक्टूबर की प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल से पहले सरकार और बैंक यूनियनों के बीच कोई समाधान निकलता है या नहीं।

अगर बात नहीं बनी तो इसका सीधा असर बैंकिंग सेवाओं, ग्राहकों और रोजमर्रा के वित्तीय लेन-देन पर पड़ सकता है।

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