UPI MDR Charge: UPI भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्थिति साफ की है। उन्होंने कहा कि MDR न टैक्स है, न सेस और न ही सरचार्ज। इससे मिलने वाली राशि भारत सरकार के खाते में नहीं जाएगी, बल्कि भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों और दूसरी कंपनियों के बीच रहेगी।
सरकार के मुताबिक इस शुल्क का बोझ UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा। यानी ग्राहक को अलग से MDR नहीं देना होगा।
MDR सरकार की ओर से लगाया गया टैक्स नहीं
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि MDR सरकार की ओर से लगाया गया कोई कर या शुल्क नहीं है। यह भुगतान व्यवस्था में शामिल अलग-अलग पक्षों के बीच लिया जाने वाला शुल्क है।
इसमें बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता और यूपीआई से जुड़ी अन्य कंपनियां शामिल हैं। MDR से मिलने वाली राशि इसी भुगतान तंत्र में वितरित होगी और इसका कोई हिस्सा भारत सरकार के खाते में नहीं जाएगा।
2,000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर लागू होगा MDR
नए नियम के तहत 2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा दुकानदार भुगतानों पर 0.4% MDR लागू होगा। वहीं, 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने की जानकारी दी गई है।
हालांकि, हर UPI भुगतान पर यह शुल्क नहीं लगेगा। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI भुगतान को MDR से बाहर रखा गया है। इसी तरह 2,000 रुपये तक के दुकानदार भुगतान पर भी MDR लागू नहीं होगा।
ग्राहक को नहीं देना होगा अलग से चार्ज
वित्त मंत्री के मुताबिक MDR का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा। बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि दुकानदार इस शुल्क को ग्राहकों से न वसूलें।
यानी UPI से भुगतान करते समय ग्राहक को MDR के नाम पर अलग से कोई शुल्क नहीं देना होगा।
करीब 96 फीसदी दुकानदार भुगतान रहेंगे बाहर
सरकार के अनुसार करीब 96 फीसदी दुकानदारों से जुड़े UPI लेनदेन इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे। छोटे दुकानदारों के लिए शून्य MDR की व्यवस्था जारी रहेगी।
इसके अलावा UPI के जरिए हर महीने एक लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले छोटे दुकानदारों को भी इस दायरे से बाहर रखा गया है।
क्यों लाई गई यह व्यवस्था?
सरकार का कहना है कि नए MDR का उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लंबे समय तक मजबूत और टिकाऊ बनाए रखना है। इसका दायरा मुख्य रूप से 2,000 रुपये से अधिक के निर्धारित दुकानदार भुगतानों तक सीमित रहेगा, जबकि सामान्य व्यक्ति-से-व्यक्ति UPI भुगतान और छोटे दुकानदारों से जुड़े अधिकांश लेनदेन इससे बाहर रहेंगे।
