Monday, September 21

रांची: 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा यूपीआई व्यापारी लेन-देन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने चिंता जताई है। चैंबर ने प्रस्तावित MDR को वापस लेने और व्यापारियों के लिए मौजूदा शून्य-MDR व्यवस्था को जारी रखने की मांग की है।
चैंबर अध्यक्ष तुलसी पटेल ने केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र भेजकर व्यापार और उद्योग जगत की चिंताओं से अवगत कराया। चैंबर का कहना है कि देश में यूपीआई के तेजी से प्रसार और व्यापारियों के बीच इसकी स्वीकार्यता में शून्य-MDR व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

व्यापारियों पर बढ़ सकता है अतिरिक्त आर्थिक बोझ

चैंबर अध्यक्ष के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी-से-ग्राहक यूपीआई लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होने से व्यापारिक प्रतिष्ठानों की परिचालन लागत बढ़ सकती है। प्रति लेन-देन राशि कम दिखाई देने के बावजूद बड़ी संख्या में डिजिटल भुगतान करने वाले कारोबारों पर इसका संचयी प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है।
उन्होंने कहा कि खुदरा विक्रेता, थोक व्यापारी, वितरक और सेवा क्षेत्र से जुड़े कई व्यवसाय सीमित मार्जिन पर काम करते हैं। ऐसे में कर्मचारियों के वेतन, परिवहन, बिजली, किराया, अनुपालन और अन्य परिचालन खर्चों में बढ़ोतरी के बीच डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क व्यापारियों के लिए एक और आर्थिक बोझ बन सकता है।

डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में शून्य-MDR की भूमिका

झारखंड चैंबर ने अपने पत्र में कहा कि कई वर्षों से बिना MDR के उपलब्ध यूपीआई भुगतान व्यवस्था ने नकद से डिजिटल भुगतान की ओर बदलाव को गति दी है। चैंबर के मुताबिक, डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की लागत बढ़ने से कुछ क्षेत्रों में व्यापारियों के भुगतान संबंधी व्यवहार प्रभावित होने की आशंका है।
चैंबर ने यह भी कहा कि वह यूपीआई व्यवस्था की दीर्घकालिक स्थिरता, भुगतान सुरक्षा और इससे जुड़ी सेवाओं में निवेश की आवश्यकता को समझता है। हालांकि, संगठन का मानना है कि इसके लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे व्यापारियों के लिए डिजिटल भुगतान स्वीकार करना हतोत्साहित न हो।

वित्त मंत्रालय और RBI से पुनर्विचार की मांग

चैंबर अध्यक्ष तुलसी पटेल ने केंद्रीय वित्त मंत्री से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा यूपीआई व्यापारी लेन-देन पर प्रस्तावित MDR वापस लेने और व्यापारियों के लिए मौजूदा शून्य-MDR व्यवस्था जारी रखने का आग्रह किया।
इसके साथ ही चैंबर ने प्रस्तावित MDR के MSME, खुदरा व्यापारियों और अधिक संख्या में डिजिटल लेन-देन करने वाले व्यवसायों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का विस्तृत आकलन करने की मांग की है। चैंबर ने इस प्रक्रिया में उद्योग संगठनों के साथ परामर्श करने का भी आग्रह किया।
इस संबंध में झारखंड चैंबर की ओर से RBI के गवर्नर को भी पत्र भेजा गया है।

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