Wednesday, September 9

देश के सबसे समृद्ध खनिज संपदा वाले राज्यों में शुमार झारखंड में खनन विभाग प्रशासनिक और मानव संसाधन के मोर्चे पर गंभीर संकट से जूझ रहा है। राज्य के 24 जिलों में से केवल 17 जिलों में ही नियमित, पूर्णकालिक या प्रभारी अधिकारियों की व्यवस्था की गई है, जबकि 7 महत्वपूर्ण जिलों में कैडर के मूल जिला खनन पदाधिकारी (DMO) तैनात ही नहीं हैं

इन जिलों में विभाग खान निरीक्षकों या अतिरिक्त प्रभार के सहारे काम चलाने को मजबूर है। एक तरफ जहाँ राज्य सरकार राजस्व बढ़ाने और अवैध उत्खनन पर नकेल कसने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ खनिज राजस्व के सबसे बड़े स्रोत वाले जिलों में ही अधिकारियों की कमी विभाग की प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर सवाल खड़े करती है।

​किन 7 जिलों में नहीं हैं मूल DMO?

​विभागीय आंकड़ों और सूची के विश्लेषणात्मक अध्ययन से यह साफ उजागर हुआ है कि राज्य के 7 जिलों में जिला खनन पदाधिकारी की स्थायी कुर्सी खाली है। इन जिलों में पदानुक्रम को ताक पर रखकर कनिष्ठ अधिकारियों को जिले की कमान सौंपी गई है:

  1. ​गुमला: यहाँ जिला खनन पदाधिकारी का मूल पद रिक्त है। वर्तमान में खान निरीक्षक (Mining Inspector) विभूति कुमार को कमान सौंपी गई है (पदस्थापन तिथि: 16.02.2024)।
  2. ​लोहरदगा: बॉक्साइट उत्खनन के लिए प्रसिद्ध इस जिले में खान निरीक्षक राजाराम प्रसाद के भरोसे खनन विभाग चल रहा है (पदस्थापन तिथि: 22.12.2022)।
  3. पलामू: पलामू जैसे संवेदनशील जिले में खान निरीक्षक सुनील कुमार को जिम्मेदारी दी गई है (पदस्थापन तिथि: 03.09.2024)।
  4. खूँटी: यहाँ भी कैडर DMO की अनुपस्थिति के कारण खान निरीक्षक राम नरेश सिंह को पदस्थापित किया गया है (पदस्थापन तिथि: 16.02.2024)।
  5. सिमडेगा: इस सीमावर्ती जिले में खान निरीक्षक महेन्द्र प्रसाद विभाग संभाल रहे हैं (पदस्थापन तिथि: 16.02.2024)।
  6. कोडरमा: अभ्रक (Mica) और क्रेसर उद्योग के लिए चर्चित कोडरमा में स्थायी DMO नहीं हैं। गिरिडीह DMO सत्यजीत को यहाँ का ‘अतिरिक्त प्रभार’ सौंपा गया है (पदस्थापन तिथि: 15.01.2025)।
  7. सरायकेला-खरसावाँ: औद्योगिक दृष्टि से अहम इस जिले में भी मूल DMO नहीं हैं। भूतत्ववेता ज्योति शंकर सत्पथी अतिरिक्त प्रभार में कार्य देख रहे हैं (पदस्थापन तिथि: 16.02.2024)।

पद की विषमता: DMO की कुर्सी पर कहीं गेओलॉजिस्ट तो कहीं इंस्पेक्टर

​झारखंड खनन विभाग की प्रशासनिक संरचना में यह देखा जा रहा है कि एक ही पद का निर्वहन अलग-अलग स्तर के अधिकारी कर रहे हैं। पूरे राज्य में कैडर के मूल जिला खनन पदाधिकारी (DMO) केवल 3 जिलों में ही तैनात हैं

  1. हजारीबाग: अजित कुमार (जिला खनन पदाधिकारी
  2. साहेबगंज: कृष्ण कुमार किस्कू (जिला खनन पदाधिकारी)
  3. गिरिडीह: सत्यजीत (जिला खनन पदाधिकारी)

​बाकी जिलों में कार्यबल (Manpower) का संतुलन बनाने के लिए राज्य सरकार ने अन्य तकनीकी संवर्ग के अधिकारियों को DMO का प्रभार दे रखा है:

  1. भूतत्ववेता (Geologist) के भरोसे 4 जिले: धनबाद (रितेश राज तिग्गा), रांची (मो० अब हुसैन), देवघर (सुभाष रवीदास), और गढ़वा (राजेन्द्र उराँव) में भूतत्ववेताओं को DMO की जिम्मेदारी सौंपी गई है।​
  2. सहायक खनन पदाधिकारी (AMO) के भरोसे 10 जिले: बोकारो (रवि कुमार सिंह), गोड्डा (सन्नी कुमार), चाईबासा (मेघलाल टुडू), पाकुड़ (राजेश कुमार), जमशेदपुर (सतीश कुमार नायक), लातेहार (मो० नदीम शफी), दुमका (आनन्द कुमार), रामगढ़ (निशान्त अभिषेक), चतरा (मनोज टोप्पो) तथा जामताड़ा (मिहिर सलकर)।

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17 जिलों की स्थिति का तुलनात्मक खाका

राज्य भर के जिलों में अधिकारियों की तैनाती, उनके मूल पद और पदस्थापन तिथियों की विस्तृत जानकारी नीचे तालिका में दी गई है:

प्रभार व्यवस्था से उपजी प्रशासनिक चुनौतियाँ

​विशेषज्ञों का मानना है कि खान निरीक्षकों (Mining Inspectors) को सीधे DMO का दायित्व सौंप देने से कई प्रशासनिक विषमताएं पैदा हो रही हैं।

अवैध खनन पर नियंत्रण का अभाव: खान निरीक्षक का मूल कार्य धरातल पर जाकर अवैध खनन, अवैध परिवहन और चालान की जाँच करना है। जब वही अधिकारी कार्यालय में बैठकर फाइलें निपटाएगा, तो चालान की जांच और छापेमारी अभियान कौन चलाएगा?

​राजस्व नुकसान की आशंका: प्रभार में काम करने वाले कनिष्ठ अधिकारी अक्सर बड़े खनन माफियाओं या नियम उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त वैधानिक फैसले लेने में हिचकिचाते हैं।​

अतिरिक्त प्रभार का बोझ: कोडरमा और सरायकेला-खरसावाँ जैसे जिलों में अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार (Additional Charge) दिया गया है। दो-दो जिलों का काम एक साथ देखने के कारण कोई भी एक जिला प्रशासनिक रूप से पूरी तरह सुदृढ़ नहीं हो पाता।

विभागीय पदोन्नति और सीधी भर्ती पर सवाल

राज्य में DMO के कैडर पदों का रिक्त होना झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। वर्षों से सहायक खनन पदाधिकारियों और भूतत्ववेताओं की नियमित पदोन्नति (Promotion) न होना और नई सीधी नियुक्तियों में देरी इस स्थिति का मुख्य कारण माना जा रहा है।​

समय रहते यदि कैडर DMO की नियमित नियुक्ति या पदोन्नति नहीं की गई, तो राज्य के प्रमुख राजस्व स्रोत वाले विभाग की स्थिति आने वाले दिनों में और अधिक चिंताजनक हो सकती है।

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क्र. सं.जिलातैनात अधिकारी का नाममूल पद / स्थितिपदस्थापन तिथि

  1. धनबाद: रितेश राज तिग्गा भूतत्ववेता (26.09.2024)
  2. हजारीबाग: अजित कुमार जिला खनन पदाधिकारी (16.02.2024)
  3. बोकारो: रवि कुमार सिंह सहायक खनन पदाधिकारी (28.03.2022)
  4. गोड्डा: सन्नी कुमार सहायक खनन पदाधिकारी (16.02.2024)
  5. रांची: मो० अब हुसैन भूतत्ववेता (16.02.2024)
  6. चाईबासा: मेघलाल टुडू सहायक खनन पदाधिकारी (16.02.2024)
  7. देवघर: सुभाष रवीदास भूतत्ववेता (16.02.2024)
  8. पाकुड़: राजेश कुमार सहायक खनन पदाधिकारी (01.10.2024)
  9. जमशेदपुर: सतीश कुमार नायक सहायक खनन पदाधिकारी (24.02.2024)
  10. साहेबगंज: कृष्ण कुमार किस्कू जिला खनन पदाधिकारी (24.02.2024)
  11. गिरिडीह: सत्यजीत जिला खनन पदाधिकारी (05.09.2023)
  12. लातेहार: मो० नदीम शफी सहायक खनन पदाधिकारी (16.02.2024)
  13. गढ़वा: राजेन्द्र उराँव भूतत्ववेता (26.09.2024)
  14. दुमका: आनन्द कुमार सहायक खनन पदाधिकारी (04.09.2024)
  15. रामगढ़: निशान्त अभिषेक सहायक खनन पदाधिकारी (16.02.2024)
  16. चतरा: मनोज टोप्पो सहायक खनन पदाधिकारी (16.02.2024)
  17. जामताड़ा: मिहिर सलकर सहायक खनन पदाधिकारी (01.10.2024)

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Sanjana Kumari is a media professional, content writer, and voiceover artist with experience since 2023. She has expertise in digital media, social media, news writing, editing, and content management. Currently, she works as an Input In-Charge at Jharkhand Digital, handling news inputs and digital content. She is proficient in writing and articulating articles and voiceovers in both Hindi and English.

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