Wednesday, September 9

रांची/बुंडू: बुंडू में अवैध बालू उठाव और परिवहन को लेकर झारखंड डिजिटल की टीम ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित कर प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। खबर में नदी घाटों पर जेसीबी से बालू उठाने, ट्रैक्टरों से ढुलाई और रात के समय हाइवा के जरिए बालू ले जाने के दावों के साथ यह सवाल उठाया गया था कि आखिर इतनी गतिविधियों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ रही है।

खबर सामने आने के बाद इसका असर भी देखने को मिला। शुक्रवार की रात DMO और SDPO साहब खुद मौके पर पहुंचे और नदी घाटों तथा बालू परिवहन से जुड़े मामलों का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के बाद अधिकारियों की ओर से कहा गया कि जांच के दौरान अवैध तरीके से बालू उठाव या परिवहन जैसी कोई गड़बड़ी नहीं मिली। अधिकारियों के अनुसार, जिन वाहनों से बालू ले जाया जा रहा था, उनके चालान काटे गए हैं और बालू स्टाॅक का है. लेकिन जो तस्वीरें हम दिखा रहे हैं उसको देखने से साफ है कि सैकड़ों ट्रैक्टर दिन रात नदी से बालू का उठाव कर रहे हैं. एनजीटी की रोक के बावजूद यह बालू कैसे उठाया जा रहा है..क्या नदी के नीचे कोई स्टाॅकया्र्ड बनाया गया है. जहां से उठाया जा रहा बालू वैध स्टॉक से लिया जा रहा है।

लेकिन प्रशासन की जांच में फिलहाल सब कुछ नियमों के मुताबिक मिला।

लेकिन यहीं से कहानी खत्म नहीं होती।

झारखंड डिजिटल की टीम के पास मौजूद साक्ष्यों के आधार पर अब कुछ सवाल DMO और SDPO साहब से पूछना जरूरी हो जाता है।

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खबर छपी तो रात में पहुंचा प्रशासन, लेकिन सवाल अब भी वही

झारखंड डिजिटल ने जब बुंडू के नदी घाटों पर बालू उठाव को लेकर सवाल उठाए, तो उसके बाद शुक्रवार की रात DMO और SDPO का मौके पर पहुंचना अपने आप में महत्वपूर्ण है। कम से कम इतना तो साफ है कि खबर ने प्रशासन का ध्यान उस इलाके की ओर खींचा और अधिकारी खुद निरीक्षण के लिए पहुंचे।

अब प्रशासन ने अपनी जांच में गड़बड़ी नहीं मिलने की बात कही है, तो झारखंड डिजिटल की टीम भी कुछ सीधे सवालों के जवाब चाहती है।

क्योंकि अगर सब कुछ वैध है, तो फिर यह वैधता सिर्फ बयान में नहीं, जमीन पर भी दिखाई देनी चाहिए।

DMO साहब, वैध स्टॉक आखिर है कहां?

अधिकारियों की ओर से कहा गया कि नदी से उठाया जा रहा बालू वैध स्टॉक से लिया जा रहा है।

DMO साहब, वह वैध स्टॉक आखिर है कहां?

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क्या वो बालू का स्टॉक नदी के नीचे है? अगर ऐसा नहीं है तो ये कौन सा स्टॉक है जो नदी से उठाया जा रहा है ?

DMO साहब द्वारा बताया गया कि सारे स्टॉक वैद्य तरीके से उठाया जा रहा है। अगर स्टॉक वैध है तो नदी के अंदर जेसीबी से उठाया जा रहा बालू किस स्टॉक का हिस्सा है? कौन सा स्टॉक होल्डर अपना स्टॉक नदी की तलहटी में जमा करके रखता है, DMO साहब?

अगर प्रशासन के पास इसका स्पष्ट जवाब है, तो उसे सामने आना चाहिए।

चालान है तो बालू का स्रोत भी बताइए

प्रशासन ने यह भी कहा है कि बालू ले जाने वाले वाहनों के चालान काटे गए हैं।

बिल्कुल ठीक।

लेकिन चालान होना और बालू के स्रोत का वैध होना एक ही बात नहीं है।

सवाल यह है कि वाहन में लदा बालू आया कहां से? उस बालू की मात्रा कौन से स्टॉक से मेल खा रही है? क्या स्टॉक की भौतिक जांच हुई? क्या यह देखा गया कि जितना बालू कागज पर मौजूद है, उतना वास्तव में जमीन पर भी है? क्यूंकि सारे बालू तो नदी के नीचे से उठाये जा रहे है।

आनंद साहू और तेजू साहू के नाम पर जांच क्यों नहीं?

झारखंड डिजिटल की पिछली खबर में बालू के अवैध कारोबार और अवैध वसूली को लेकर आनंद साहू और तेजू साहू के नाम सामने आने का भी उल्लेख किया गया था।

लेकिन SDPO साहब बताने को तैयार ही नहीं है कि

आनंद साहू और तेजू महतो कौन हैं?

बालू कारोबार में इनकी भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए। बताया गया है कि यह दोनों यहाँ के मैनेजर है। बालू लदे वाहनों से अवैध रकम की वसूली करते है और यह पैसा पुलिस अधिकारियों तक पहुंचाते है।

क्या इनके स्तर पर कोई जांच या निरीक्षण किया गया? अगर शिकायतों में नाम सामने आ रहे हैं, तो फिर जांच उन नामों तक भी पहुंचनी चाहिए। क्योंकि सिर्फ सड़क पर जांच से खुलासा नहीं हो पाएगा यह आईवाॅश कहलाएगा. सच्चाई खंगालनी है तो नदी घाट पर जाकर छानबीन की जानी चाहिए थी जहां जेसीबी या ट्रैक्टर साफ दिखाई दे जाते.

खबर का असर दिखा, अब जांच का असर भी दिखना चाहिए

झारखंड डिजिटल की टीम ने बुंडू में बालू उठाव को लेकर सवाल उठाए। खबर सामने आई और इसके बाद शुक्रवार की रात DMO और SDPO खुद निरीक्षण के लिए मौके पर पहुंचे।

यह निश्चित तौर पर अच्छी बात है।

लेकिन अब अगला सवाल यह है कि इस निरीक्षण का नतीजा सिर्फ ‘सब वैध है’ तक रहेगा या वास्तव में पूरे बालू कारोबार की गहराई से जांच होगी?

अगर सब कुछ नियमों के मुताबिक है तो प्रशासन को खुलकर बताना चाहिए कि कौन सा स्टॉक होल्डर अपना स्टॉक नदी के नीचे रखता है ?

इस सवाल का जवाब अब DMO और SDPO साहब को तो देना तो बनता है।

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Sanjana Kumari is a media professional, content writer, and voiceover artist with experience since 2023. She has expertise in digital media, social media, news writing, editing, and content management. Currently, she works as an Input In-Charge at Jharkhand Digital, handling news inputs and digital content. She is proficient in writing and articulating articles and voiceovers in both Hindi and English.

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