भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नीतिन गडकरी के ड्रीम प्रोजेक्ट पर झारखंड के भ्रष्टाचारी हावी हो गये हैं. NHAI झारखंड के पदाधिकारियों का गोरखधंधा देखिए कि बदहाल , घटिया सड़क के निर्माण के लिए ठेकेदार को 270 करोड़ का भुगतान कर डालते हैं. मामला भारतमाला प्रोजेक्ट का है जिसपर गड्ढों और घटिया निर्माण की शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही. भारतमाला परियोजना के पैकेज-2 (ओरमांझी-गोला सड़क) निर्माण कार्य में भारी भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है. स्थानीय लोग आक्रोशित हैं लेकिन उनकी फरियाद को जिला प्रशासन और NHAI के पदाधिकारी दबाकर डकार मार जा रहे हैं. जिस ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड किया जाना चाहिए उसे 270 करोड़ का भुगतान भी कर डाला गया.
M/S बर्बरिक प्रोजेक्ट लिमिटेड को मिला है 1200 करोड़ का काम
इस सड़क के निर्माण की जिम्मेदारी M/S बर्बरिक प्रोजेक्ट लिमिटेड को मिली है. निर्माण की कुल लागत करीब 1200 करोड़ बतायी जा रही है जिसमें 270 करोड़ का भुगतान भी किया जा चुका है. इस सड़क की लम्बाई 27.8 किमी है. घटिया सड़क निर्माण के लिए किसी संवेदक को इतना बड़ा भुगतान किया जाना कई सवालों को खड़ा कर रहा है. ज्ञात हो कि इस प्रोजेक्ट के लिए झारखंड के कई स्थानीय लोगों की जमीनों का भी अधिग्रहण का जा रहा है.
₹270 करोड़ से अधिक के भुगतान पर सवाल
जानकारी के अनुसार घटिया निर्माण सामग्री के बावजूद NHAI द्वारा सड़क को स्वीकृत (Approved) किया गया और ठेकेदार को ₹270 करोड़ से अधिक की राशि का भुगतान कर दिया गया, जो भ्रष्टाचार का ज्वलंत उदाहरण है. आखिर ठेकेदार के साथ NHAI के प्रोजेक्ट डाएरेक्टर और अन्य पदाधिकारियों का क्या रिश्ता है जिसके कारण गडकरी के ड्रीम प्रोजेक्ट को भ्रष्टाचार की भेंट चढाया जा रहा है.
जगह-जगह धंस रही है सड़क और डिवाइडर
उल्लेखनीय है कि इस सड़क पर जगह-जगह दरारें आ गई हैं. 18 अगस्त 2026 को बरियातू चौक से सोनागद तक डिवाइडर, गार्डवाल और रेलिंग धंसने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों की जान-माल को खतरा पैदा हो गया है. स्थानीय लोगों ने इस संबंध में कई बार पदाधिकारियों से शिकायतें की हैं लेकिन उसपर कोई संज्ञान नहीं लिया जा रहा. कारर्वाई तो दूर की बात है ठेकेदार के साथ पदाधिकारियों की बैठकों की खबरें बढ़ गयी हैं.
सांसद चन्द्रप्रकाश चौधरी ने भी लगाए गंभीर आरोप
इस मामले में कुछ दिनों पूर्व सांसद चन्द्रप्रकाश चौधरी ने भी पत्र जारी कर एनएचएआई (NHAI) और संबंधित अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. सांसद ने बाकायदा जियो टैग के साथ बदहाल सड़क की कई तस्वीरें भी अपने पत्र में लगायी हैं. साथ ही साथ यह भी दावा किया है कि अगर सांसद की भी सुनवाई नहीं हुई तब उन्हें कोर्ट की शरण लेना पड़ेगा.
सांसद ने की है मांग
विशेष जांच दल (SIT) का गठन: पूरे सड़क निर्माण कार्य की क्रमवार गहन जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया जाए.
IIT से गुणवत्ता जांच: सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच किसी सेवानिवृत्त अधिकारी से कराने के बजाय IIT जैसे राष्ट्रीय स्तर के शोध संस्थान से कराई जाए.
ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करना: जांच रिपोर्ट के आधार पर पैकेज-2 के संवेदक (ठेकेदार) को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट किया जाए.
कार्रवाई की समयसीमा: भारत सरकार के लोक एवं कार्मिक विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए 7 दिनों के भीतर की गई प्रशासनिक कार्रवाई से अवगत कराया जाए.
सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी ने चेतावनी दी है कि यदि आवश्यक हुआ तो इन सभी दस्तावेजों और पत्राचार को जनहित एवं राष्ट्रहित में सक्षम न्यायालय के समक्ष साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा.
