प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कामकाजी वर्ग के हित में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए मासिक वेतन की सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति महीने करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से देश के लगभग 51 लाख अतिरिक्त कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा और उनका सामाजिक सुरक्षा कवच मजबूत होगा।
विश्वकर्मा जयंती से लागू होगा नया नियम
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के मुताबिक, वर्तमान में निजी क्षेत्र में औसत वेतन लगभग ₹23,000 है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। नई ₹25,000 की वेतन सीमा 17 सितंबर यानी विश्वकर्मा जयंती से पूरे देश में लागू कर दी जाएगी, जिससे प्राइवेट सेक्टर का बड़ा कामकाजी वर्ग सीधे सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ जाएगा। इस फैसले की घोषणा केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद एक ब्रीफिंग की।
फैसले का मुख्य उद्देश्य
अभी तक ₹15,000 से अधिक मूल वेतन पर नौकरी शुरू करने वाले कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से ईपीएफ का लाभ नहीं मिलता था। सीमा बढ़ने से ₹15,000 से ₹25,000 वेतन ब्रैकेट वाले लाखों कर्मचारी कानूनन सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आएंगे, जिससे उनकी बचत और बुढ़ापे की सुरक्षा बढ़ेगी।
कर्मचारियों को मिलेंगे ये फायदे
नई व्यवस्था से पीएफ खाते में ज्यादा रकम जमा होगी और ‘कर्मचारी पेंशन योजना’ के तहत मिलने वाली पेंशन में भी सुधार होगा। साथ ही ‘कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना’ के तहत मिलने वाला बीमा कवर भी बढ़ेगा। बता दें कि इससे पहले सितंबर 2014 में यह सीमा ₹6,500 से बढ़ाकर ₹15,000 की गई थी।
सरकार और कंपनियों पर वित्तीय प्रभाव
इस फैसले से सरकार का सालाना खर्च बढ़कर ₹11,339 करोड़ होने का अनुमान है, जो अभी ₹10,250 करोड़ है। अगले पांच वर्षों में इस पर कुल ₹56,696 करोड़ खर्च होने की उम्मीद है। नियोक्ताओं को भी ₹25,000 तक सैलरी वालों के लिए 12% योगदान देना होगा, जिससे कर्मचारियों की टिकने की दर बेहतर होने की संभावना है।
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