Wednesday, October 14

रांची। झारखंड के गिरिडीह जिले के मधुबन थाना क्षेत्र के रहने वाले पूर्व नक्सली इतवारी हांसदा उर्फ सोनोत उर्फ शनिचरा की रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में इलाज के दौरान मौत हो गई। 26 वर्षीय इतवारी ने कुछ ही दिन पहले झारखंड पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। सरेंडर के बाद उसे हजारीबाग स्थित ओपन जेल भेजा गया था।

जानकारी के अनुसार, ओपन जेल में रहने के दौरान इतवारी की तबीयत बिगड़ गई। उसे तेज बुखार और अत्यधिक कमजोरी की शिकायत के बाद अस्पताल ले जाया गया। प्रारंभिक उपचार के बाद उसकी स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए रांची के RIMS रेफर किया गया था। यहां कई दिनों तक चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार चला, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हो सका।

28 जुलाई को किया था आत्मसमर्पण

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, 28 जुलाई 2026 को इतवारी हांसदा ने अपने 16 अन्य साथियों के साथ पुलिस के सामने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया था। सरेंडर के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे हजारीबाग के ओपन जेल में रखा गया था।

बताया गया कि 31 जुलाई को वह ओपन जेल पहुंचा था। इसके कुछ ही दिनों बाद उसकी तबीयत खराब हो गई। तेज बुखार और कमजोरी की शिकायत के बाद उसे 2 अगस्त को शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल, हजारीबाग में भर्ती कराया गया।

इलाज के दौरान उसकी स्थिति गंभीर बनी रही। 4 अगस्त को मेडिकल बोर्ड ने उसकी हालत का आकलन करने के बाद उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की अनुशंसा की। इसके बाद 7 अगस्त को उसे RIMS, रांची में भर्ती कराया गया।

RIMS में नहीं बच सकी जान

RIMS में चिकित्सकों की टीम उसके इलाज में जुटी थी। हालांकि उपचार के बावजूद उसकी स्थिति लगातार गंभीर बनी रही। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक 13 अगस्त 2026 को सुबह 10:29 बजे इलाज के दौरान इतवारी हांसदा ने दम तोड़ दिया।

उसकी मौत की सूचना संबंधित अधिकारियों और विभागीय स्तर पर दी गई है। मौत के वास्तविक कारणों को लेकर चिकित्सकीय रिपोर्ट और अन्य आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।

मिसिर बेसरा का बॉडीगार्ड रह चुका था

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक इतवारी हांसदा का नक्सली संगठन में सक्रिय जुड़ाव रहा था। वह एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा का बॉडीगार्ड भी रह चुका था। गिरिडीह के मधुबन थाना क्षेत्र के मोहनपुर गांव निवासी इतवारी के पिता का नाम सोनाराम हांसदा बताया गया है।

सरेंडर के बाद वह नक्सली गतिविधियों से अलग होकर मुख्यधारा में लौटने की प्रक्रिया में था। उसके खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर वह न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहा था।

इस बीच इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। अब पुलिस और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी चिकित्सकीय रिपोर्ट समेत अन्य दस्तावेजों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं।

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