नई दिल्ली/रांची। झारखंड कांग्रेस में हलचल तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी नवंबर 2026 के पहले सप्ताह में दो दिवसीय झारखंड दौरे पर आएंगे, जिसका मकसद पेसा (PESA) कानून के जमीनी क्रियान्वयन को मजबूत करना और संगठन में नई ऊर्जा भरना है। इस दौरे की पुष्टि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के झारखंड प्रभारी के. राजू ने 18 सितंबर को जारी एक आधिकारिक पत्र के जरिए की, जो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश को संबोधित है।
खूंटी: आदिवासी अधिकारों की आवाज़ बनेंगे राहुल गांधी
दौरे का पहला पड़ाव खूंटी होगा, जहां राहुल गांधी राज्य के पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों के पारंपरिक ग्राम सभा प्रधानों से रूबरू होंगे। यह महज़ एक औपचारिक भेंट नहीं, बल्कि जमीनी शासन व्यवस्था को केंद्र में रखने की कोशिश है — पेसा कानून के सही क्रियान्वयन, ग्राम प्रधानों के अधिकारों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने पर सीधी बातचीत। कांग्रेस इसे आदिवासी स्वायत्तता और विकास के एजेंडे से जोड़कर देख रही है।
रांची: प्रशिक्षण के बहाने परिवारों को साधने की रणनीति
दूसरा पड़ाव प्रदेश की राजधानी रांची है, जहां जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) अध्यक्षों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर लगेगा। दिलचस्प यह है कि इस बार सिर्फ पदाधिकारी ही नहीं, बल्कि उनके परिवार भी आमंत्रित हैं। पार्टी नेतृत्व का आकलन है कि यह कदम संगठन में सिर्फ कार्यकर्ताओं का मनोबल ही नहीं बढ़ाएगा, बल्कि सांगठनिक एकजुटता को पारिवारिक जुड़ाव की मजबूत बुनियाद भी देगा।
तैयारियों को लेकर सख्त निर्देश
AICC प्रभारी के. राजू ने प्रदेश कांग्रेस को दौरे से पहले पांच बिंदुओं पर स्पष्ट होमवर्क सौंपा है:
- पांचवीं अनुसूची वाले गांवों के पारंपरिक ग्राम सभा प्रधानों की सूची DCC अध्यक्षों के साथ साझा की जाए
- अक्टूबर में प्रखंड स्तर पर पेसा नियमावली पर प्रशिक्षण कार्यशालाएं हों, जिनमें DCC अध्यक्ष, प्रखंड अध्यक्ष और पेसा मास्टर ट्रेनर की मौजूदगी अनिवार्य हो
- पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग से ग्राम प्रधानों के लिए पहचान पत्र जारी कराने का अनुरोध किया जाए
- हर ग्राम प्रधान को व्यक्तिगत निमंत्रण पत्र भेजा जाए
- कार्यक्रम की तारीख तय होते ही DCC अध्यक्षों को सपरिवार उपस्थिति की पूर्व सूचना दी जाए
निगरानी के लिए बनेंगी समितियां
पत्र में यह भी साफ किया गया है कि इन दोनों आयोजनों के सुचारू प्रबंधन के लिए राज्य और जिला, दोनों स्तर पर विशेष समितियां गठित होंगी। JPCC के उपाध्यक्ष, प्रदेश प्रभारी और जिला प्रभारी इस पूरी कवायद की लगातार निगरानी करेंगे। AICC के इस निर्देश के बाद झारखंड कांग्रेस में बैठकों और रणनीतिक तैयारियों का दौर शुरू हो चुका है — साफ है कि पार्टी इस दौरे को सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि 2026 में आदिवासी वोट बैंक और संगठनात्मक ढांचे, दोनों मोर्चों पर एक बड़े राजनीतिक निवेश के तौर पर देख रही है।
