‘बालिका वधू’ फेम अभिनेत्री प्रत्यूषा बनर्जी की मौत से जुड़े करीब 10 साल पुराने मामले में रांची के राहुल राज सिंह को बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने राहुल राज सिंह को मामले से डिस्चार्ज कर दिया है। फैसले के बाद राहुल ने कहा कि करीब एक दशक से उनके ऊपर जो कानूनी और मानसिक बोझ था, वह अब काफी हद तक उतर गया है।
राहुल राज सिंह ने फैसले के बाद अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब उनके वकील ने फोन कर हाई कोर्ट के फैसले की जानकारी दी, तो वह कुछ देर तक बिल्कुल खामोश रहे। उनकी आंखों में आंसू आ गए। राहुल के मुताबिक, उस वक्त सबसे पहले उन्हें प्रत्यूषा की याद आई और उनके मन में यह ख्याल आया कि काश वह आज यह फैसला सुनने के लिए मौजूद होतीं।
10 साल तक चला कानूनी संघर्ष
राहुल ने बताया कि इस मामले ने पिछले 10 वर्षों में उनकी निजी जिंदगी के साथ-साथ करियर को भी प्रभावित किया। उनके मुताबिक, उन्हें कोर्ट-कचहरी, सामाजिक दबाव और मीडिया में चल रही चर्चाओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस पूरे दौर में उनके माता-पिता उनके साथ मजबूती से खड़े रहे।
राहुल का कहना है कि मामले के बाद उनके अभिनय और प्रोडक्शन से जुड़े काम पर भी असर पड़ा और इंडस्ट्री में उनसे दूरी बनाई गई।
आखिरी बातचीत को लेकर राहुल ने बताई अपनी बात
प्रत्यूषा के साथ आखिरी बातचीत का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा कि कॉल रिकॉर्ड से उस रात की स्थिति को समझने में मदद मिली। उनके मुताबिक, प्रत्यूषा उस समय काफी परेशान थीं और वह उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे थे।
राहुल ने दावा किया कि उन्होंने प्रत्यूषा से कहा था कि वह 15-20 मिनट में घर पहुंच रहे हैं और उनसे कोई गलत कदम नहीं उठाने की अपील की थी। उनके अनुसार, दोनों के बीच निजी जिंदगी और करियर को लेकर कुछ तनाव था, लेकिन उन्हें लगता था कि बातचीत के जरिए इसे सुलझाया जा सकता था।
प्रत्यूषा के परिवार के दर्द को समझने की बात
प्रत्यूषा के परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों पर राहुल ने कहा कि वह उनके माता-पिता के दर्द को समझते हैं, क्योंकि उन्होंने अपनी बेटी को खोया है। हालांकि, उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया और कहा कि वह प्रत्यूषा से सच्चा प्यार करते थे और कभी उनका बुरा नहीं चाहा।
‘राहुल’ के लिए क्यों अहम है हाई कोर्ट का फैसला?
हाई कोर्ट से डिस्चार्ज होने के बाद राहुल ने कहा कि यह फैसला उनके लिए सिर्फ एक कानूनी राहत नहीं है। उनके मुताबिक, करीब 10 साल तक चले इस मामले ने उनकी जिंदगी को जिस तरह प्रभावित किया, उसके बाद यह फैसला उनके लिए एक लंबे अध्याय के खत्म होने जैसा है।
प्रत्यूषा को याद करते हुए राहुल ने कहा कि वह उनके लिए सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं थीं, बल्कि बेहद मासूम और दिल की साफ इंसान थीं। उन्होंने कहा कि इतने साल बाद भी उन्हें खोने का दुख उनके भीतर कायम है और वह उम्मीद करते हैं कि अब लोग उनके रिश्ते और पूरे मामले को सामने आए साक्ष्यों और अदालत के फैसले के आधार पर नए नजरिए से देखेंगे।
इसे भी पढ़े – RKDF University School of Law में नई पीढ़ी का विधिक सफर शुरू, अधिवक्ताओं ने साझा किए Courtroom के अनुभव
