Thursday, October 15

पैकेट में बिकने वाले खाद्य पदार्थों को खरीदते वक्त अक्सर उपभोक्ता उसमें मौजूद नमक, चीनी और फैट की मात्रा को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर सेहत पर भारी पड़ सकता है। इसी समस्या को दूर करने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक अहम कदम उठाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत ज्यादा नमक, चीनी और वसा वाले पैकेटबंद उत्पादों के आगे लाल रंग में साफ चेतावनी दी जाएगी, ताकि उपभोक्ता एक नजर में समझ सकें कि उत्पाद उनकी सेहत के लिए कितना नुकसानदायक हो सकता है।

पैकेट के सामने लगेगा लाल चेतावनी निशान

एफएसएसएआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि उसने ज्यादा मात्रा में अतिरिक्त चीनी और नमक वाले खाद्य प्रोडक्ट्स के लिए पैकेट के सामने प्रमुख चेतावनी देने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके लिए लाल रंग में निशान लगाने का प्रस्ताव है, ताकि उपभोक्ताओं को यह जानकारी सरल, प्रमुख और आसानी से समझ आने वाले तरीके से मिल सके कि किसी खाद्य उत्पाद में चिंता वाले पोषक तत्वों की मात्रा ज्यादा है। यह प्रस्ताव ICMR-NIN द्वारा जारी भारतीयों के लिए 2024 के आहार संबंधी दिशा-निर्देशों में तय सीमा के आधार पर तैयार किया गया है।

लाल निशान में साफ लिखा होगा क्या है ज्यादा

एफएसएसएआई के अनुसार, लाल चेतावनी वाले निशान में जरूरत के अनुसार जानकारी दी जाएगी। इसमें ‘ज्यादा फैट’, ‘ज्यादा चीनी’, ‘ज्यादा नमक’ या ‘बहुत ज्यादा मीठा पेय’ जैसी चेतावनियां लिखी जा सकती हैं। इसका मकसद यह है कि उपभोक्ता पैकेट के सामने देखकर ही आसानी से पहचान सकें कि किसी उत्पाद में बताए गए पोषक तत्वों की मात्रा ज्यादा है। साथ ही यह भी बताया गया कि पैकेट के सामने दी जाने वाली चेतावनी का अक्षर आकार, पीछे की पोषण तालिका में इस्तेमाल अक्षर से एक अंक बड़ा होगा। इसके अलावा तस्वीर के रूप में भी अतिरिक्त चीनी, फैट और नमक की जानकारी देने का प्रस्ताव है।

सुप्रीम कोर्ट में दायर किया हलफनामा

एफएसएसएआई ने यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट में दायर अनुपालन हलफनामे में दी है, जो 13 अगस्त के कोर्ट आदेश के पालन में दाखिल किया गया। यह मामला सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट ‘3एस एंड आवर हेल्थ सोसाइटी’ की याचिका पर चल रहा है, जिसमें अधिवक्ता राजीव शंकर द्विवेदी ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पैकेटबंद खाद्य उत्पादों पर अनिवार्य चेतावनी लगाने के निर्देश देने की मांग की थी। गौरतलब है कि 13 अगस्त की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने चेतावनी लेबल लागू करने में देरी को लेकर एफएसएसएआई को कड़ी फटकार लगाई थी और पूछा था कि क्या सरकार अपने लोगों को स्वस्थ नहीं रखना चाहती।

दो चरणों में लागू होगा नया नियम

एफएसएसएआई ने बताया कि इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रस्ताव है, ताकि उपभोक्ताओं को इसे अपनाने और खाद्य उद्योग को अपने प्रोडक्ट्स में जरूरी बदलाव करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। पहले चरण में उन प्रोडक्ट्स को शामिल किया जाएगा जिनमें अतिरिक्त फैट, चीनी और नमक में से दो या अधिक तत्व ज्यादा मात्रा में हैं, जिसमें कुछ निर्धारित मीठे पेय भी शामिल हैं। दूसरे चरण में उन प्रोडक्ट्स पर भी चेतावनी लागू होगी, जिनमें इनमें से कोई एक तत्व अधिक मात्रा में पाया जाता है।

कुछ उत्पादों को मिलेगी छूट

हालांकि कुछ प्रोडक्ट्स को इस चेतावनी की अनिवार्यता से बाहर रखने का प्रस्ताव भी दिया गया है। इनमें केवल एक सामग्री से बने उत्पाद, साथ ही घी, खाद्य तेल, नमक, चीनी, गुड़ और शहद जैसे स्वाभाविक रूप से फैट, चीनी या नमक से भरपूर उत्पाद शामिल हैं। हालांकि इन पर भी खाद्य सुरक्षा और लेबलिंग से जुड़े अन्य नियम लागू रहेंगे।

बच्चों और संवेदनशील समूहों का रखा जाएगा खास ध्यान

एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया कि इस पूरी व्यवस्था का मकसद उपभोक्ताओं को प्रभावी और आसानी से समझ में आने वाली जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे खाने का चुनाव करते समय सही निर्णय ले सकें। खासतौर पर बच्चों और आबादी के अन्य संवेदनशील समूहों के लिए जानकारीपूर्ण विकल्प उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। एफएसएसएआई ने कहा कि इस प्रस्ताव को संबंधित नियमों में संशोधन के जरिए अधिसूचित किया जाएगा और इसके लिए तय प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।

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