Wednesday, September 23

सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइज़ेशन (CDSCO) ने हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स, फार्मासिस्ट, रिटेलर्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स, अस्पतालों और आम जनता के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी सर्कुलर जारी किया है। इसमें पेनकिलर, खासकर नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) और एंटीबायोटिक्स के अंधाधुंध इस्तेमाल से क्रोनिक किडनी डिज़ीज़ (CKD) के बढ़ते खतरे के बारे में बताया गया है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) के 21 सितंबर के इस सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि इन दवाओं का इस्तेमाल तभी होना चाहिए जब चिकित्सकीय रूप से जरूरी हो, सही डोज़ और सही समय के लिए, और किसी रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर की देखरेख में हो।

बिना प्रिस्क्रिप्शन नहीं बिक सकतीं ये दवाएं

सर्कुलर में बताया गया कि ज़्यादातर NSAIDs ‘ड्रग्स रूल्स, 1945’ के शेड्यूल H में शामिल हैं, इसलिए इन्हें रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना रिटेल में नहीं बेचा जा सकता। इसी तरह अधिकतर एंटीबायोटिक दवाएं शेड्यूल H1 में आती हैं, जिन पर खास चेतावनियां लिखी होना जरूरी है। एडवाइजरी में साफ कहा गया है कि इन दवाओं को बिना मेडिकल सलाह के बार-बार या लंबे समय तक लेना खतरनाक है, और साधारण वायरल इन्फेक्शन जैसी बीमारियों में जिनमें एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती, इनका सेल्फ-मेडिकेशन नहीं करना चाहिए।

किडनी के मरीजों के लिए खास सावधानी

DGHS ने खासतौर पर उन लोगों को सतर्क किया है जिन्हें पहले से किडनी की बीमारी है या किडनी खराब होने का खतरा है—उन्हें NSAID लेने से पहले अपने डॉक्टर को इस बारे में जरूर बताना चाहिए। अगर दर्द, बुखार या अन्य लक्षण बार-बार बने रहते हैं, तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेने की सिफारिश की गई है। डॉक्टरों को भी सलाह दी गई है कि वे मरीज की उम्र, बीमारी की स्थिति और किडनी संबंधी जोखिम को ध्यान में रखते हुए सबसे कम असरदार डोज़ और कम से कम समय के लिए ही दवा लिखें।

फार्मासिस्ट और अस्पतालों को भी निर्देश

DGHS ने फार्मासिस्ट, रिटेलर और डिस्ट्रीब्यूटर को शेड्यूल H और H1 दवाओं की बिक्री से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करने और सेल्फ-मेडिकेशन को बढ़ावा न देने का निर्देश दिया है। एंटीबायोटिक के मामले में एंटीमाइक्रोबियल स्टीवर्डशिप के सिद्धांतों के अनुसार समझदारी से दवा लिखने पर जोर दिया गया है, जिसमें गलत डोज़ या बिना जरूरत लंबे समय तक इलाज जारी रखने से बचने की बात कही गई है। अस्पतालों को भी प्रिस्क्रिप्शन की निगरानी और मरीजों की काउंसलिंग मजबूत करने की सलाह दी गई है, जबकि राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों के ड्रग्स कंट्रोल अधिकारियों से इस एडवाइजरी के बारे में जन-जागरूकता फैलाने का अनुरोध किया गया है।

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