Friday, October 2

UPI MDR Charge: ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने मामले को खारिज नहीं किया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने संकेत दिया कि यह मामला केवल कानूनी सवाल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें तकनीकी और नीतिगत पहलू भी जुड़े हुए हैं।

15 अक्टूबर से लागू होना है नया नियम

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की ओर से घोषित नए नियम के तहत 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट्स (P2M) पर 0.4% MDR शुल्क लागू किया जाना है। इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी और नए शुल्क पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई थी।

हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल इस मांग को स्वीकार नहीं किया है। साथ ही, मामले में केंद्र सरकार और RBI का पक्ष जानने के लिए उन्हें नोटिस जारी किया गया है। कोर्ट का सवाल- आखिर यह रकम जाएगी कहां ?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और RBI से यह स्पष्ट करने को कहा कि ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर प्रस्तावित चार्ज से किस पक्ष को आर्थिक लाभ मिलेगा। पीठ ने यह भी पूछा कि क्या इस शुल्क में किसी टैक्स देने वाली संस्था की भूमिका है और इसे फीस माना जाए या टैक्स।

सरकार का रुख है कि MDR को टैक्स या सेस नहीं माना जा सकता। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह भुगतान व्यवस्था से जुड़े सेवा प्रदाताओं के बीच लिया जाने वाला शुल्क है और इससे प्राप्त रकम भारत की संचित निधि में नहीं जाती।

आम UPI यूजर्स के लिए क्या बदलेगा?

इस फैसले का सीधा असर व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI ट्रांसफर पर नहीं पड़ेगा। यानी एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले सामान्य UPI भुगतान पर यह शुल्क लागू नहीं होगा।

MDR का प्रस्तावित शुल्क मर्चेंट यानी दुकानदारों और कारोबारियों से जुड़े चुनिंदा P2M ट्रांजैक्शन पर लागू होगा। ऐसे में इसका असर मुख्य रूप से उन व्यापारियों पर पड़ने की बात सामने आई है, जो ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान स्वीकार करते हैं।

क्या है MDR ?

Merchant Discount Rate (MDR) वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर मर्चेंट ट्रांजैक्शन से जुड़ी भुगतान व्यवस्था में लिया जाता है। UPI के संदर्भ में लंबे समय से जीरो-MDR व्यवस्था लागू रही है। अब ₹2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने के प्रस्ताव को लेकर विवाद सामने आया है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था पर अंतरिम रोक नहीं लगाई है, लेकिन अंतिम फैसला भी नहीं दिया है। केंद्र सरकार और RBI के जवाब के बाद मामले की आगे सुनवाई होगी।

 

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