Wednesday, September 9

पाकुड़: विकास की रफ्तार से दूर पाकुड़ का काबिलपुर गांव आज भी एक अदद पक्की पुलिया का इंतजार कर रहा है। गांव के लोगों के लिए नदी पार करना कोई रोजमर्रा का आसान काम नहीं, बल्कि हर दिन जोखिम उठाने जैसा है। पिछले करीब 30 साल से ग्रामीण बांस की बनाई अस्थायी पुलिया के सहारे नदी पार कर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे पाकुड़ सदर प्रखंड के काबिलपुर गांव के लोगों के पास फिलहाल आवागमन का यही सहारा है। साइकिल हो या जरूरी सामान, पुलिया पार करते समय लोगों को उसे कंधे पर टांगकर चलना पड़ता है। पतली और अस्थायी बांस की पुलिया पर एक कदम भी संभलकर रखना पड़ता है।

बारिश में और खतरनाक हो गई पुलिया

मानसून के दौरान गांव के पास बहने वाली बरसाती नदी का जलस्तर बढ़ जाता है। यह नदी आगे जाकर गंगा में मिलती है। पिछले कई दिनों से हो रही बारिश के कारण नदी में पानी बढ़ा हुआ है और बांस की पुलिया पर फिसलन भी काफी बढ़ गई है।

ऐसे में जरा सी चूक किसी बड़े हादसे की वजह बन सकती है। अगर कोई व्यक्ति पुलिया पार करते समय फिसलकर नदी में गिर जाए या पानी के दबाव में बांस की पुलिया टूट जाए तो स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

बच्चों के लिए भी रोज का जोखिम

सबसे चिंता की बात यह है कि इसी खतरनाक पुलिया से स्कूली बच्चे भी रोजाना स्कूल आने-जाने के लिए गुजरते हैं। कई बार उनके माता-पिता बच्चों के साथ होते हैं, लेकिन कई बच्चे अकेले भी इस पुलिया को पार करने को मजबूर हैं।

बारिश के मौसम में जब बांस पर फिसलन बढ़ जाती है और नीचे नदी का पानी तेज होता है, तब बच्चों के लिए यह रास्ता और भी जोखिम भरा हो जाता है।

ग्रामीणों का दावा- पहले भी हो चुके हैं हादसे

ग्रामीणों का दावा है कि अतीत में इस बांस की पुलिया से गिरने के कारण लोगों की जान तक जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक यहां स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

ग्रामीणों को सबसे ज्यादा चिंता बारिश के दौरान नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर है। उनका कहना है कि अगर नदी का पानी और बढ़ा और पुलिया बह गई तो गांव का संपर्क पाकुड़ सदर और प्रखंड मुख्यालय से पूरी तरह कट सकता है।

पुल बहा तो गांव बन जाएगा टापू

ग्रामीणों के मुताबिक, बांस की पुलिया ही गांव को मुख्य इलाके से जोड़ने का एक प्रमुख रास्ता है। ऐसे में इसके बह जाने पर काबिलपुर का संपर्क बाहर की दुनिया से कट सकता है और गांव के लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी भारी परेशानी उठानी पड़ेगी।

अब ग्रामीण सरकार और प्रशासन से इस समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं। उनकी मांग है कि नदी पर जल्द से जल्द पक्की पुलिया का निर्माण कराया जाए, ताकि करीब तीन दशक से चली आ रही यह मजबूरी खत्म हो और लोगों को जान जोखिम में डालकर नदी पार न करनी पड़े।

काबिलपुर के ग्रामीणों के लिए सवाल सिर्फ एक पुलिया का नहीं है, बल्कि सुरक्षित रास्ते और बुनियादी सुविधा के अधिकार का है। तीन दशक बीत जाने के बाद भी अगर लोगों को बांस के सहारे नदी पार करनी पड़ रही है, तो अब नजर सरकार और प्रशासन की ओर है।

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Sanjana Kumari is a media professional, content writer, and voiceover artist with experience since 2023. She has expertise in digital media, social media, news writing, editing, and content management. Currently, she works as an Input In-Charge at Jharkhand Digital, handling news inputs and digital content. She is proficient in writing and articulating articles and voiceovers in both Hindi and English.

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