अजय महतो उर्फ टाईगर का गिरीडीह में आतंक
परवाटांड़ में न्यू पुलिस लाइन में किया था सीरियल ब्लास्ट
राज्य पुलिस ने गिरफ्त में आए अजय महतो से पूछताछ के बाद उसकी पत्नी बबीता को भी शनिवार तड़के गिरफ्तार कर लिया है. बताया जा रहा है कि संगठन में एरिया कमांडर के रुप में काम कर चुकी बबीता ही अजय की सबसे बड़ी ताकत है. वह अपनी पत्नी के साथ मिलकर नक्सली रणनीति और कांड को अंजाम देने की साजिश रचता था. अजय ने संगठन में रहने वाली गोमिया की बबीता संथाली से शादी की है. उसका नाम कई नक्सली घटनाओं में भी आ चुका है. वह मूल रूप से बोकारो जिले के गोमिया थाना इलाके के लुगु जलग ढोढ़ी गांव की रहने वाली है
पुलिस लाइन पर हमला कर सीधे सरकार को दी थी चुनौती
साल 2012 राज्य सरकार ने गिरीडीह शहर से सटे पपरवाटांड में न्यू पुलिस लाइन की बिल्डिंग के निर्माण का आदेश दिया जिसके बाद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में यह कार्य शुरु किया गया. उस वक्त पूरे इलाके में नक्सलियों की दहशत सर चढ़कर बोलती थी. सरकार और पुलिस को भरोसा था कि पुलिस लाइन के बन जाने से इस इलाके में नक्सलियों के आतंक पर लगाम लगाया जा सकेगा. पपरवाटांड समेत आसपास के लोगों को अब यह यकीन हो चला था कि यह क्षेत्र सुरक्षित रहेगा. लेकिन जैसे ही नक्सलियों को इसकी भनक लगी 23 जुलाई 2012 की रात अजय महतो के नेतृत्व में नक्सलियों का बड़ा दस्ता इलाके में प्रवेश करता है. गिरिडीह-डुमरी सड़क पर तीनकोनिया से लेकर बदडीहा तक बाइक पर सवार वर्दीधारी नक्सलियों का जमावड़ा लग गया. उस दृश्य को देखने वाले बताते हैं कि ऐसा लग रहा था जैसे नसक्सलियों का मेला लगा हुआ है और रोकने वाला कोई भी नहीं है. इस बीच नक्सली हरेक सड़क पर एक के बाद एक आठ विस्फोट करते हैं. इस सीरियल विस्फोट ने पुलिस लाइन की निर्माणाधीन भवन को हिला डाला. मजदूर की भी मौत हुई. इस घटना के बाद यह साफ हो गया कि झारखंड पुलिस के लिए अजय महतो बहुत बड़ी चुनौती है.
2010 में उड़ा दिया था पुलिस वैन
4 अगस्त 2010 , इलाका पूरी तरह से नक्सलियों की गोद में था. इस बीच गिरिडीह डुमरी पथ से होकर बैंक की कैश वैन गुजर रही थी. वैन पर एसआईएस के पांच गार्ड भी सवार थे. तभी पीरटांड थाना इलाके के पुरनानगर में निर्माणाधीन पुल पर जोर से धमाका हुआ. नक्सलियों ने यहां बारूदी सुरंग विस्फोट कर दिया. बैंक की कैश वैन उड़ गई. इस हमले में एसआईएस के पांच गार्ड मारे गए. इस घटना से एक दिन पहले पीरटांड थाना के पीछे फायरिंग हुई थी. दोनों कांड के बाद एक नाम कॉमन था – अजय महतो. पुलिस भी यही कहती रही कि इन घटनाओं को अजय महतो के नेतृत्व में अंजाम दिया गया.
दहशत ऐसी कि मौत भी खौफ खा जाए
बताया जाता है कि जब नक्सलवाद परवान चढ़ा हुआ था, तब दहशत फैलाने के लिए मुखबिरी का आरोप लगाकर हत्याएं आम थीं. गिरिडीह के पीरटांड, देवरी, डुमरी, निमियाघाट इलाके में हत्याओं का दौर भी चला था. पारसनाथ की तराई वाले इलाके में पड़ने वाले तीन थाना – पीरटांड, डुमरी और निमियाघाट, में जब भी नक्सली किसी की हत्या करते, तो एक ही नाम चर्चा में रहता था – टाइगर. लोग कहते हैं कि जब भी अजय क्षेत्र में आता तो किसी न किसी का मरना तय रहता. लोग यह भी कहते हैं कि उस वक्त अजय का कहना था कि पुलिस की मुखबिरी की तो सजा-ए-मौत मिलनी तय है. हालांकि जैसे-जैसे समय गुजरा और नक्सलवाद पर लगाम लगने लगी, अजय की दहशत भी कम हुई
जीटी रोड में बरपाया कहर, ले ली जवानों की जान
पारसनाथ की तराई में अवस्थित निमियाघाट हो या धनबाद का तोपचांची या फिर बरवाअड्डा. हर जगह अजय के दस्ते ने कहर बरपाया था. 2012 में 26 जून को नक्सली बंद के दौरान तोपचांची थाना इलाके में जीटी रोड पर गश्त कर रही पुलिस टीम पर गोलीबारी की गई थी. पुलिस के दो जवान शहीद हो गए थे जबकि 15 घायल हुए थे.
कैदी वाहन पर हमला, शहीद हुए पुलिसकर्मी
अजय महतो का जिक्र हो तो मुफ्फसिल थाना इलाके के अजीडीह कैदी वाहन पर हमले का जिक्र किए बिना अधूरा रह जाएगा. तारीख थी 9 नवंबर 2012, शाम का वक्त था. गिरिडीह कोर्ट में पेशी के बाद 8 बड़े और कुख्यात नक्सलियों समेत कुल 32 बंदियों को कैदी वाहन में लेकर पुलिस मोहनपुर स्थित केंद्रीय कारा जा रही थी. तभी अजीडीह के पास नक्सलियों ने हमला बोल दिया. हमले में तीन पुलिसकर्मी शहीद हो गए. हमले के बाद 29 बंदी भाग निकले. इस घटना को अंजाम देने में शुरुआत में चिराग के दस्ते का नाम आया, लेकिन जैसे-जैसे गिरफ्तारियां हुईं तो पुलिस द्वारा अजय महतो का नाम लिया जाने लगा.
240 मामलों का वांटेड
अजय के खिलाफ लगभग 240 मामले दर्ज हैं. ये मामले गिरिडीह के पीरटांड, मुफ्फसिल, डुमरी, निमियाघाट, बेंगाबाद, सरिया, खुखरा, मधुबन, बगोदर, सरिया के अलावा धनबाद के तोपचांची, गोविंदपुर, बरवाअड्डा, टुंडी, हरिहरपुर, बोकारो के महुआटांड, पेटरवार, बोकारो थर्मल, नावाडीह, गोमिया के अलावा चाईबासा समेत झारखंड के अलग-अलग जिलों के थानों में दर्ज हैं.
आठवीं तक की पढ़ाई
अजय महतो का जो प्रोफाइल पुलिस महकमे के पास है, उसके अनुसार चांदो महतो और मंझली देवी का पुत्र अजय को अंजन दा, टाइगर, मोछू और श्रीकांत के नाम से भी जाना जाता था. अजय महतो ने कक्षा आठ तक की पढ़ाई की थी. अजय जब नक्सली संगठन में चला गया तो उसके भाई भीखन महतो और प्रयाग महतो ने किसानी की राह चुनी. दोनों भाई घर में रहकर खेती-बाड़ी में जुटे रहे.
