Wednesday, November 4

गम्हरिया थाना प्रकरण की जांच रिपोर्ट में पुलिसकर्मियों की गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता उजागर, एसडीपीओ ने थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की

सरायकेला। जिस पुलिस पर महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, उसी पुलिस के थाने में एक महिला की सुरक्षा को लेकर ऐसी गंभीर लापरवाही सामने आई है, जिसने पूरे पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया थाना परिसर में देर रात एक महिला के पहुंचने से शुरू हुआ घटनाक्रम सुबह होते-होते पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने लगा। अब इस पूरे मामले की विभागीय जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिसकर्मियों की भूमिका पर कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं।

अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, सरायकेला की ओर से 31 अक्टूबर 2026 को पुलिस अधीक्षक को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में थाना प्रभारी सह पुलिस अवर निरीक्षक संजय प्रसाद, गश्ती दल के पुलिस अवर निरीक्षक अनिरुद्ध सिंह, ओडी पदाधिकारी मनोज साहू और मुंशी आरक्षी 1088 संतोष राय की भूमिका को गंभीर लापरवाही, अनुशासनहीनता और गैर-जिम्मेदाराना आचरण वाला बताया गया है। जांच अधिकारी ने इन सभी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की है।

गम्हरिया थाना प्रभारी समेत कुल 15 पुलिस पदाधिकारी और कर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया. वही कुल 3 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।

रिपोर्ट का सबसे गंभीर पहलू यह है कि घरेलू हिंसा से परेशान होकर मदद मांगने पहुंची महिला को थाने लाने के बाद उसकी सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी निभाने में पुलिसकर्मी एक-दूसरे पर निर्भर नजर आए। महिला आखिरकार थाने के एक पुलिसकर्मी नीरज के कमरे तक कैसे पहुंची और रात के कई घंटों तक वहां क्या परिस्थितियां बनी रहीं, इसकी पूरी कहानी जांच रिपोर्ट में दर्ज बयानों से सामने आती है।

आधी रात को मदद मांगने पहुंची महिला, पति पर मारपीट का आरोप

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 29 और 30 अक्टूबर 2026 की दरम्यानी रात करीब 11:50 बजे छोटा गम्हरिया के पूर्व पंचायत समिति सदस्य अजीत कुमार सिंह को स्थानीय महिला मनीषा देवी ने फोन कर सूचना दी कि उनके घर के पास एक महिला पहुंची है। महिला का कहना था कि उसका पति उसके साथ मारपीट कर रहा है और उसे जान से मारने की आशंका है। वह मदद की गुहार लगा रही थी।

अजीत कुमार सिंह ने इस सूचना से गम्हरिया थाना के बड़े बाबू को अवगत कराया। इसके बाद महिला को पुलिस गश्ती दल के हवाले किया गया। जांच में सामने आया कि महिला के पति का नाम शंकर दास है और उसके बारे में बताया गया कि यह उसकी तीसरी शादी है।

थाने लाने के फैसले में भी चलता रहा असमंजस

गश्ती दल में शामिल एएसआई अनिरुद्ध सिंह के बयान के अनुसार, वह आरक्षी मुनेश्वर कुमार के साथ रात्रि गश्ती पर थे। करीब 12:29 बजे वे छोटा गम्हरिया पहुंचे। वहां अजीत सिंह ने बताया कि महिला के साथ उसके पति ने मारपीट की है।

पुलिसकर्मियों ने शुरुआत में महिला को थाना ले जाने को लेकर असमंजस जताया। महिला पुलिसकर्मी उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई। करीब आधे घंटे तक इसी तरह की बातचीत होती रही। इसके बाद बड़े बाबू की ओर से फोन पर निर्देश मिलने के बाद महिला को सरकारी वाहन से थाने लाया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, महिला को लेकर पुलिसकर्मी करीब रात 1:30 से 2 बजे के बीच थाने पहुंचे। यहां ओडी ड्यूटी में तैनात एएसआई मनोज साहू को महिला के आने की जानकारी दी गई। बड़े बाबू के निर्देश पर मुंशी संतोष राय को जगाकर महिला के ठहरने की व्यवस्था करने को कहा गया।

थाने में महिला के लिए सुरक्षित जगह तक नहीं मिली!

जांच रिपोर्ट में एएसआई मनोज साहू के बयान के अनुसार, महिला को ओडी के सामने रखे सोफे पर बैठाया गया था। कुछ देर बाद महिला को ठंड लगने लगी। इसके बाद उसे पुलिस निरीक्षक के कार्यालय में बैठाने के लिए दरवाजा खोला जा रहा था। इसी दौरान नीरज नामक पुलिसकर्मी अपने कमरे से बाहर आया और महिला को अपने कमरे में बैठाने की बात कही। फिर बाहर से दरवाजे की कुंडी लगा दी गई।

रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि नीरज के कमरे में पहले से एक युवक और युवती मौजूद थे। वे रात करीब 2:30 से 2:45 बजे के बीच ओडी के पास से गुजरे और नीरज उन्हें गेट तक छोड़ने गया। इसके बाद वह वापस अपने कमरे में आ गया।

लेकिन इसके बाद जो घटनाक्रम सामने आया, उसने पूरे थाने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

महिला को अपने कमरे में ले गया नीरज, अंदर से बंद कर लिया दरवाजा

जांच रिपोर्ट में एएसआई मनोज साहू के बयान के अनुसार, महिला को नीरज के कमरे में ले जाने और वहां रखने की पूरी जानकारी उन्हें नहीं थी। वहीं, बाद में मुंशी संतोष राय को फोन पर सूचना मिली कि नीरज एक महिला को लेकर अपने कमरे में चला गया है।

मुंशी संतोष राय के बयान के मुताबिक, सुबह करीब 5:31 बजे मनोज साहू का फोन आया। उन्होंने बताया कि नीरज एक महिला को लेकर कमरे में घुस गया है। इसके बाद थाने के पुलिसकर्मी वहां पहुंचे। खिड़की से देखने पर दोनों कमरे के अंदर सोए हुए दिखाई दिए। दरवाजा अंदर से बंद था।

दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया गया, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। काफी आवाज लगाने और दरवाजा खटखटाने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला। आखिरकार लोहे के पाइप से दरवाजा तोड़ना पड़ा।

रिपोर्ट के अनुसार, दरवाजा खुलने पर नीरज और महिला कमरे के अंदर बिस्तर पर सोए हुए मिले। दोनों ने अपने कपड़े पहने और फिर थाने से बाहर चले गए। इस घटनाक्रम ने पुलिसकर्मियों की निगरानी व्यवस्था और महिला की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

थाना परिसर में आखिर किसकी थी जिम्मेदारी?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब महिला घरेलू हिंसा की शिकायत लेकर पुलिस संरक्षण में थाने पहुंची थी, तब उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी? महिला को ओडी के सामने बैठाने के बाद एक पुलिसकर्मी के निजी कमरे तक पहुंचाने की अनुमति किसने दी? कमरे का दरवाजा बाहर से बंद करने और बाद में अंदर से बंद होने तक किसी अधिकारी ने इसकी निगरानी क्यों नहीं की?

जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि महिला को लेकर थाने पहुंचने के बाद संबंधित पुलिसकर्मियों के बीच जिम्मेदारी को लेकर गंभीर समन्वय का अभाव था। रातभर थाने के भीतर महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं दिखाई दी।

थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की अनुशंसा

अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी की जांच रिपोर्ट का निष्कर्ष पुलिस विभाग के लिए बेहद असहज करने वाला है। जांच अधिकारी ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि पूरे घटनाक्रम में थाना प्रभारी सह पुलिस अवर निरीक्षक संजय प्रसाद, पुलिस अवर निरीक्षक अनिरुद्ध सिंह, पुलिस अवर निरीक्षक मनोज साहू और आरक्षी 1088 संतोष राय की भूमिका में घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता और गैर-जिम्मेदाराना आचरण परिलक्षित होता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस घटना से पुलिस की छवि धूमिल हुई है। लिहाजा, संबंधित पदाधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की अनुशंसा की जाती है।

यह जांच रिपोर्ट 31 अक्टूबर 2026 को पुलिस अधीक्षक, सरायकेला-खरसावां को भेजी गई है। यानी अब पुलिस अधीक्षक के स्तर से इस अनुशंसा पर आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ होता है।

कई सवाल अब भी अनुत्तरित, पुलिस की साख पर लगा दाग

इस जांच रिपोर्ट ने गम्हरिया थाना परिसर में महिला के साथ हुए घटनाक्रम को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या थाने में महिला की सुरक्षा के लिए कोई निर्धारित व्यवस्था नहीं थी? क्या रात्रि ड्यूटी में तैनात अधिकारियों को यह जानकारी नहीं थी कि महिला कहां रखी गई है? यदि जानकारी थी तो समय रहते हस्तक्षेप क्यों नहीं किया गया? और सबसे अहम, थाने के भीतर एक पुलिसकर्मी के कमरे में महिला के पहुंचने तक जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे?

यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में पुलिसकर्मियों की प्रशासनिक और विभागीय लापरवाही सामने आई है। रिपोर्ट अपने आप में किसी यौन अपराध के आरोप को प्रमाणित करने वाला अंतिम निष्कर्ष नहीं है। ऐसे आरोपों की पुष्टि संबंधित कानूनी जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

फिलहाल, एसडीपीओ की रिपोर्ट ने गम्हरिया थाना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस थाने में पीड़ित महिला को सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, उसी थाने के भीतर उसकी सुरक्षा को लेकर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? यह सवाल अब सिर्फ गम्हरिया थाना का नहीं, बल्कि पूरे पुलिस महकमे की जवाबदेही से जुड़ गया है।

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