बानो (सिमडेगा):
विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड अंतर्गत गेनमेर पंचायत के टोनिया कर्राडमर गांव की हकीकत आज भी बदहाल है। पांगुर नाले पर पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों को एक बार फिर बेहद दर्दनाक और शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ा। गांव निवासी सुनील कडुलना की आत्महत्या के बाद उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाना था, लेकिन सड़क और पुल के अभाव में एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी।
मजबूरी में ग्रामीणों ने शव को खटिया पर रखा और कंधों के सहारे उफनते पांगुर नाले को पार कराया। नाला पार करने के बाद दूसरी ओर खड़ी एंबुलेंस तक शव को पहुंचाया गया, जहां से उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। यह दृश्य केवल एक शव यात्रा नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक उदासीनता की एक मार्मिक तस्वीर बनकर सामने आया।
बरसात में गांव बन जाता है टापू
ग्रामीणों के अनुसार पांगुर नाले पर पुल निर्माण की मांग वर्षों से की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। बारिश के दिनों में नाले का जलस्तर बढ़ जाने से गांव का संपर्क बाहरी दुनिया से लगभग कट जाता है। ऐसे में मरीजों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए भी खटिया का सहारा लेना पड़ता है।
हर आपात स्थिति बन जाती है चुनौती
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुल जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में हर आपातकालीन स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। गांव तक वाहन नहीं पहुंच पाने के कारण समय पर इलाज मिलना मुश्किल हो जाता है, जिससे कई बार लोगों की जान भी जोखिम में पड़ जाती है।
प्रशासनिक दावों पर उठे सवाल
सुनील कडुलना के शव को खटिया पर ढोकर नाला पार कराने की घटना ने एक बार फिर विकास और बुनियादी ढांचे को लेकर किए जा रहे सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पांगुर नाले पर पुल का निर्माण कर दिया जाता, तो उन्हें ऐसी पीड़ादायक और अपमानजनक स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, संबंधित विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से पांगुर नाले पर अविलंब पुल निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पुल बनने से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि भविष्य में किसी भी मरीज, गर्भवती महिला या मृतक के परिजनों को इस तरह की बेबसी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
