Wednesday, September 23

देश में मादक पदार्थों के कारोबार के खिलाफ केंद्र सरकार ने अब स्पष्ट समय-सीमा के साथ अभियान आगे बढ़ाने की तैयारी की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 दिसंबर 2029 तक भारत से ड्रग्स के कारोबार को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर तालमेल के साथ इस लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर पर चलाने पर जोर दिया।

शाह मंगलवार को नई दिल्ली में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) प्रमुखों के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई को उसी सामूहिक संकल्प के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है, जैसा आतंकवाद, उग्रवाद और वामपंथी उग्रवाद जैसी चुनौतियों के खिलाफ अपनाया गया।

उन्होंने कहा कि अब ड्रग्स के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का समय है और सामूहिक प्रयासों से 31 दिसंबर 2029 तक भारत से इस अवैध कारोबार को उखाड़ फेंकने में सफलता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, पूरे नेटवर्क पर फोकस

केंद्र की नई रणनीति में केवल ड्रग्स की जब्ती और आरोपियों की गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित रखने के बजाय पूरे सप्लाई नेटवर्क को निशाना बनाने पर जोर है। इसमें ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर रसायनों के अवैध इस्तेमाल पर रोक, तस्करी से जुड़े पैसों की जांच, खुफिया तंत्र को मजबूत करना और ड्रग्स की मांग कम करना शामिल है।

शाह ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों से भी ड्रग्स विरोधी अभियान के लिए जनशक्ति, तकनीक, बजट और अन्य संसाधनों को प्राथमिकता देने की अपील की। उनका कहना था कि इस जिम्मेदारी को केवल गृह मंत्रालय या नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसके लिए सरकार और समाज, दोनों स्तरों पर समन्वित प्रयास की जरूरत है।

ANTF को ‘एंटी-नारको मिशन कमांड’ बनाने का प्रस्ताव

गृह मंत्री ने राज्यों की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स और जांच एजेंसियों के बीच तालमेल मजबूत करने के लिए ANTF को एक ‘एंटी-नारको मिशन कमांड’ में बदलने का प्रस्ताव रखा।

उन्होंने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ अभियान में सरकारी तंत्र के हर स्तर की भूमिका होनी चाहिए। स्कूल के प्रिंसिपल और गांव स्तर के अधिकारियों से लेकर पुलिस अधिकारियों, डीजीपी और मुख्य सचिव तक सभी को साझा उद्देश्य के साथ काम करना होगा।

तकनीक, फॉरेंसिक और इंटेलिजेंस पर जोर

शाह ने एंटी-नारकोटिक्स अभियान में तकनीक, फॉरेंसिक क्षमता और खुफिया जानकारी जुटाने की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने ANTF से कहा कि पुलिस बलों के भीतर मिलने वाली सूचनाओं को व्यवस्थित तरीके से ठोस खुफिया जानकारी में बदलने की प्रक्रिया विकसित की जाए।

ड्रग्स तस्करी के अंतरराष्ट्रीय और वित्तीय नेटवर्क पर भी कार्रवाई की रणनीति का हिस्सा बनाया गया है। शाह ने ड्रग्स से जुड़े मामलों में शामिल विदेशी नागरिकों की पहचान, उन्हें देश से बाहर भेजने और दोबारा भारत में प्रवेश रोकने के लिए ब्लैकलिस्ट करने का विशेष अभियान चलाने की बात कही।

विदेशों में बैठे तस्करों पर भी शिकंजा

गृह मंत्री ने विदेशों से भारत में ड्रग्स की सप्लाई करने वाले भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने पर भी जोर दिया। उद्देश्य ऐसे अपराधियों को भारतीय अदालतों के सामने लाना है।

इसके साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और ड्रग्स निर्माण के ठिकानों, दोनों को निशाना बनाने की जरूरत बताई, ताकि तस्करी करने वाले नेटवर्क को मिलने वाले फायदे और उनकी गतिविधियों में मौजूद कमजोरियों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

‘विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029’ में तय हुआ रोडमैप

सम्मेलन में ‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029’ के लक्ष्यों को लागू करने पर भी जोर दिया गया। यह दस्तावेज 35 से अधिक विभागों और हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसमें ड्रग्स की सप्लाई, मांग और इससे होने वाले नुकसान से निपटने के लिए साझा रोडमैप तैयार किया गया है और अलग-अलग एजेंसियों के लिए लक्ष्य और समय-सीमा तय की गई है।

इस विजन डॉक्यूमेंट के चार प्रमुख स्तंभ हैं—कानून प्रवर्तन, खुफिया जानकारी और ऑपरेशन; प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण; डिमांड और हार्म रिडक्शन; तथा क्षमता निर्माण और समन्वय। इन क्षेत्रों के तहत 100 से ज्यादा लक्ष्यों की पहचान की गई है।

एक लाख ‘नशामुक्त मित्र’ बनाने का लक्ष्य

ड्रग्स के खिलाफ अभियान में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। शाह के मुताबिक विजन डॉक्यूमेंट में एक लाख ‘नशामुक्त मित्रों’ को पंजीकृत करने का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से विभिन्न मंत्रालयों के जरिए 46,780 लोगों का पंजीकरण पहले ही किया जा चुका है।

इन स्वयंसेवकों को जमीनी स्तर पर जागरूकता अभियान से जोड़ने की योजना है। उनसे युवाओं के बीच जागरूकता फैलाने और कैंपस अधिकारियों को संवेदनशील बनाने के लिए 10 लाख स्कूलों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों तक पहुंचने की उम्मीद है।

डार्कनेट और क्रिप्टो के जरिए तस्करी पर भी नजर

ड्रग्स तस्करी में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को भी सरकार ने बड़ी चुनौती माना है। खास तौर पर डार्कनेट प्लेटफॉर्म और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने की योजना है।

विजन डॉक्यूमेंट में ANTF के भीतर विशेष डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी सेल बनाने का प्रस्ताव शामिल है। संगठित साइबर-ड्रग तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई के लिए उन्नत तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित विश्लेषण, रिसर्च और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय का इस्तेमाल किया जाएगा।

अधिकारियों से परिवारों का दर्द समझने की अपील

अमित शाह ने ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई को कठिन बताते हुए कहा कि इसका सीधा असर युवाओं और उनके परिवारों पर पड़ता है। उन्होंने सम्मेलन में मौजूद अधिकारियों से अपील की कि वे कम से कम एक ऐसे युवा के माता-पिता और भाई-बहनों से मुलाकात करें, जो नशे की लत से प्रभावित हुआ है।

उनका कहना था कि ऐसी मुलाकातों के जरिए अधिकारी यह समझ सकेंगे कि ड्रग्स की समस्या का असर केवल किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार को इसकी मानवीय कीमत चुकानी पड़ती है।

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Sanjana Kumari is a media professional, content writer, and voiceover artist with experience since 2023. She has expertise in digital media, social media, news writing, editing, and content management. Currently, she works as an Input In-Charge at Jharkhand Digital, handling news inputs and digital content. She is proficient in writing and articulating articles and voiceovers in both Hindi and English.

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