सरायकेला-खरसावां: झारखंड में सौर ऊर्जा को बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी है। सरायकेला-खरसावां के चांडिल डैम में 600 मेगावाट क्षमता का ग्रिड से जुड़ा फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट प्रस्तावित है। क्षमता के लिहाज से यह मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी फ्लोटिंग सोलर परियोजना होगी।
परियोजना को केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना में शामिल किया गया है। झारखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (जेरेडा) ने इसके लिए जरूरी सर्वे करा लिया है। इनमें बाथिमेट्री सर्वे भी शामिल है, जिससे जलाशय की गहराई, तल की बनावट और पानी के भीतर की परिस्थितियों का आकलन किया गया है। अब सोलर पावर डेवलपर के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
पीपीपी मोड पर होगा विकास
चांडिल डैम की इस परियोजना को पीपीपी मोड पर विकसित करने की तैयारी है। इसकी कुल लागत करीब 3,500 करोड़ रुपये बताई गई है। केंद्र सरकार से करीब 600 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिलने की बात कही गई है।
परियोजना में बैटरी एनर्जी स्टोरेज की सुविधा भी प्रस्तावित है। दिन में पैदा होने वाली बिजली को स्टोर कर जरूरत के समय इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिससे रात में भी बिजली आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी।
जमीन की जगह जलाशय की सतह का इस्तेमाल
फ्लोटिंग सोलर प्लांट में जमीन के बड़े हिस्से की जरूरत नहीं पड़ती। सोलर पैनल जलाशय की सतह पर लगाए जाते हैं। चांडिल डैम में इस तकनीक के इस्तेमाल से जमीन पर दबाव कम करने के साथ उपलब्ध जल संसाधन को अक्षय ऊर्जा उत्पादन से जोड़ा जा सकेगा।
परियोजना के निर्माण, स्थापना, रखरखाव, सुरक्षा और बिजली निकासी से जुड़े कामों में रोजगार के अवसर भी पैदा होने की संभावना है। इंजीनियरिंग, विद्युत उपकरण, परिवहन और रखरखाव से जुड़ी कंपनियों को भी काम मिल सकता है।
ओंकारेश्वर के बाद देश की दूसरी बड़ी परियोजना
मध्य प्रदेश का ओंकारेश्वर जलाशय देश की प्रमुख फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं में शामिल है। तेलंगाना के रामागुंडम में 100 मेगावाट और केरल के कायमकुलम में 92 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं भी स्थापित हैं। आंध्र प्रदेश में भी फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं चल रही हैं।
चांडिल की 600 मेगावाट क्षमता वाली परियोजना पूरी होने पर झारखंड देश की बड़ी फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं वाले राज्यों में शामिल हो जाएगा।
जेरेडा के एमडी केके वर्मा के अनुसार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का जोर राज्य में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ परियोजनाओं के कारण विस्थापन को न्यूनतम रखने पर है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद चांडिल परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज की गई है। पूरा होने पर यह झारखंड का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट होगा।
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