WGC का अनुमान- छह साल के निचले स्तर पर पहुंच सकती है देश में सोने की मांग…
रांची: त्योहार का मौसम है, धनतेरस नजदीक है और उप्पर बाजार में आमतौर पर इस समय अच्छी रौनक देखने को मिलती है। लेकिन इस बार सोने की बढ़ती कीमतों ने खरीदारी का पूरा हिसाब बदल दिया है। रांची के बाजार में ग्राहक दुकानों तक पहुंच रहे हैं, गहने देख रहे हैं और भाव पूछ रहे हैं, लेकिन खरीदारी करने से पहले बजट का हिसाब भी लगा रहे हैं। कई ग्राहक कीमत जानने के बाद बिना कुछ खरीदे लौट जा रहे हैं। इसका असर दुकानदारों की तैयारी पर भी दिख रहा है। पिछले साल की तुलना में इस बार कारोबारियों ने कम स्टॉक मंगाया है। वजह साफ है- महंगे दाम पर सोना खरीदकर दुकान में रखना और फिर बिक्री नहीं होना कारोबारियों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के मुताबिक, 2026 में भारत में सोने की मांग घटकर करीब 650 मीट्रिक टन रह सकती है। ऐसा हुआ तो यह पिछले छह वर्षों में सबसे कम मांग होगी।
पिछले साल के मुकाबले कम रखा गया स्टॉक…
झारखंड डिजिटल की टीम ने रांची के सर्राफा कारोबारी पंकज जी से बाजार की मौजूदा स्थिति पर बात की। उन्होंने बताया कि सोने की कीमतों में लगातार तेजी का असर खरीदारी पर पड़ रहा है। इसी को देखते हुए इस बार पिछले साल के मुकाबले कम स्टॉक मंगाया गया है। कारोबारियों को आशंका है कि अगर ऊंची कीमत पर ज्यादा सोना खरीदकर रख लिया और बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई, तो पूंजी फंस सकती है।
पंकज जी के मुताबिक, ऐसी स्थिति दशहरा के दौरान भी देखने को मिली थी। उस समय भी ग्राहकों ने खरीदारी में सावधानी बरती। अब शादी-विवाह के सीजन में भी इसका असर दिख रहा है। पहले शादियों में लोग लाखों रुपये तक के सोने के गहने खरीदते थे, लेकिन अब खरीदारी काफी सीमित हो गई है। लोग अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से ही गहने ले रहे हैं।
दुकान तक पहुंच रहे ग्राहक, लेकिन खरीदारी से पहले सोच रहे
फिलहाल बाजार में ग्राहकों की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन खरीदारी की रफ्तार पहले जैसी नहीं है। ग्राहक दुकानों में आकर गहने देखते हैं, सोने का भाव पूछते हैं और फिर अपने बजट के हिसाब से फैसला करने की बात कहकर लौट जाते हैं। कारोबारियों के मुताबिक, इस बार प्री-ऑर्डर भी पहले की तुलना में कम मिले हैं।
आमतौर पर त्योहारों के समय दुकानदार ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग डिजाइन और वजन के गहनों का पर्याप्त स्टॉक रखते हैं। लेकिन इस बार बिक्री को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में कारोबारी जरूरत के मुताबिक ही माल मंगा रहे हैं, ताकि ज्यादा पूंजी स्टॉक में न फंसे।
सोने के साथ चांदी की कीमतों ने भी बढ़ाई परेशानी
बाजार में सिर्फ सोना ही नहीं, चांदी की कीमतें भी ग्राहकों के बजट को प्रभावित कर रही हैं। पंकज जी का कहना है कि चांदी के भाव भी काफी बढ़ गए हैं और उन्हें आने वाले दिनों में इसमें और तेजी की आशंका है। ऐसे में वे ग्राहक भी प्रभावित हो रहे हैं, जो सोने के बजाय चांदी खरीदने की योजना बनाते हैं।
उनके मुताबिक, ग्राहक अब खरीदारी को लेकर असमंजस में हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि मौजूदा भाव पर खरीदारी करें या कीमतों में कमी आने का इंतजार करें। दूसरी तरफ कारोबारियों के लिए भी यह तय करना मुश्किल है कि बाजार की मांग को देखते हुए कितना स्टॉक रखा जाए।
धनतेरस पर कितनी होगी बिक्री, कारोबारियों को इंतजार
बाजार के लिए धनतेरस साल के सबसे अहम कारोबारी दिनों में से एक है। इस दिन सोना-चांदी खरीदने की परंपरा के कारण दुकानदार अच्छी बिक्री की उम्मीद करते हैं। लेकिन इस बार रांची के कारोबारियों ने पहले से ही स्टॉक कम रखा है। उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं है कि धनतेरस पर ग्राहक कितनी खरीदारी करेंगे।
पंकज जी के अनुसार, इस बार कारोबारियों की चिंता सिर्फ बिक्री की नहीं, बल्कि लगाई गई पूंजी को सुरक्षित रखने की भी है। अगर बिक्री कम हुई और महंगे दाम पर खरीदा गया स्टॉक दुकान में रह गया, तो नुकसान उठाना पड़ सकता है।
वहीं, ग्राहकों को लेकर उनका कहना है कि अगर किसी को सोना खरीदना जरूरी है, तो वह मौजूदा भाव पर खरीदारी कर सकता है। उनके मुताबिक आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं। हालांकि, सोने और चांदी के भाव आगे किस दिशा में जाएंगे, यह बाजार की चाल पर निर्भर करेगा।
सितंबर तिमाही में 29 फीसदी घट गई सोने की मांग
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुमान के मुताबिक, 2026 में भारत में सोने की कुल मांग करीब 650 मीट्रिक टन रह सकती है। ऐसा होने पर यह 2020 के बाद सबसे कम मांग होगी। कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन और जूलरी दुकानों के बंद रहने से भी सोने की खरीदारी प्रभावित हुई थी।
WGC के भारतीय कारोबार के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सचिन जैन ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि साल के शुरुआती नौ महीनों में जूलरी की मांग में गिरावट दर्ज की गई है। इसका असर पूरे साल की कुल मांग पर पड़ सकता है।
जुलाई से सितंबर के बीच भारत में सोने की कुल मांग सालाना आधार पर 29 फीसदी घटकर 162.5 मीट्रिक टन रह गई। इस दौरान जूलरी की मांग में 20 फीसदी और निवेश के लिए सोना खरीदने की मांग में 40 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
महंगाई और कमजोर मॉनसून का भी असर
WGC के मुताबिक, सोने की ऊंची कीमतों के साथ बढ़ता जीवन-यापन खर्च भी मांग में कमी की वजह है। ईरान युद्ध के बाद महंगाई का दबाव बढ़ने से परिवारों के बजट पर असर पड़ा है। ऐसे में लोग जरूरी खर्चों को प्राथमिकता दे रहे हैं और सोने की खरीदारी टाल रहे हैं।
भारत में सोने की कुल मांग का आधे से ज्यादा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों से आता है। इस साल कमजोर मॉनसून के कारण कृषि उत्पादन और किसानों की आमदनी प्रभावित होने की आशंका है। इसका असर ग्रामीण इलाकों में सोने और गहनों की खरीदारी पर भी पड़ सकता है।
अब धनतेरस की बिक्री से मिलेगी बाजार की तस्वीर
दिवाली और शादी-विवाह के सीजन से कारोबारियों को अभी भी अच्छी बिक्री की उम्मीद है। WGC का मानना है कि त्योहार और शादी का मौसम मांग को कुछ सहारा दे सकता है, लेकिन ऊंची कीमतें इस बढ़ोतरी को सीमित कर सकती हैं।
रांची के बाजार में भी फिलहाल यही स्थिति है। दुकानें खुली हैं, ग्राहक आ रहे हैं और त्योहार की खरीदारी चल रही है, लेकिन महंगे भाव के कारण लोग पहले की तरह खुलकर खर्च नहीं कर रहे। कारोबारियों ने स्टॉक कम रखा है और अब धनतेरस की बिक्री का इंतजार कर रहे हैं। इस बार बाजार की असली तस्वीर ग्राहकों की भीड़ से नहीं, बल्कि इस बात से सामने आएगी कि दुकान तक पहुंचने वाले कितने लोग खरीदारी करके लौटते हैं।
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