Tuesday, September 22

झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य में ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूट (OCI / खुली जेल) की स्थापना और संचालन को लेकर स्वतः संज्ञान (Suo-Motu) ली गई याचिका W.P.(PIL) No. 2273 of 2026 पर सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण आदेश दिए हैं. मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की पीठ के समक्ष राज्य सरकार ने शपथ पत्र (Affidavit) दाखिल कर खुली जेलों से जुड़ी अब तक की प्रगति और कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी जिसके बाद हाई कोर्ट ने कुछ महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं.

 

📌 शपथ पत्र के मुख्य बिंदु (राज्य सरकार की रिपोर्ट)

​राज्य के मुख्य सचिव द्वारा दायर हलफनामे में खुली जेलों के प्रबंधन और सुधारों से संबंधित 6 प्रमुख बिंदुओं का विवरण दिया गया:

​1. राज्य निगरानी समिति का गठन

​झारखंड सरकार के गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने 24 जून 2026 को ‘राज्य निगरानी समिति’ का गठन किया है.

​यह समिति उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन कराने, खुली जेलों के उपयोग व विस्तार की निगरानी करने और पात्र बंदियों की समय पर पहचान व स्थानांतरण सुनिश्चित करने का काम करेगी.

​2. सुप्रीम कोर्ट की उच्च स्तरीय समिति में नामांकन

​राज्य सरकार ने गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती वंदना दाडेल (IAS) को जस्टिस एस. रवींद्र भट (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय उच्च-स्तरीय समिति में प्रतिनिधि के रूप में नामित किया है.

​3. वैधानिक और कानूनी ढांचा

​झारखंड जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं अधिनियम, 2025 की धारा 70 के तहत ओपन जेलों की स्थापना को कानूनी मंजूरी दी गई है.

​झारखंड जेल मैनुअल, 2025 (अध्याय 92) में इन जेलों के संचालन, सुरक्षा व्यवस्था (CCTV, बाड़बंदी आदि), बंदियों की पात्रता, कौशल विकास, रोजगार और परिजनों के साथ रहने के नियमों का स्पष्ट उल्लेख है.

​4. हजारीबाग में पहली खुली जेल के लिए भूमि का चयन

​लोक नायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा, हजारीबाग की सीमा से सटी 32.77 एकड़ भूमि पहली खुली जेल के लिए चिह्नित की गई है.

​क्षमता: शुरुआत में 100 सजायाफ्ता कैदियों को रखने की क्षमता होगी.

​प्रत्येक कैदी को शौचालय, रसोईघर व बुनियादी सुविधाओं वाला कॉटेज-टाइप आवास मिलेगा.

​इसके लिए ₹1,84,97,952/- के वार्षिक खर्च का अनुमान लगाया गया है.

​5. चार केंद्रीय जेलों में वैकल्पिक (Stop-Gap) व्यवस्था

​हजारीबाग में पूर्ण खुली जेल बनने तक, राज्य की चारों केंद्रीय जेलों में ओपन/सेमी-ओपन बैरक बनाने का निर्देश दिया गया है.

​हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों (Best Practices) को अपनाते हुए इसके लिए SOP तैयार की जा रही है.

​6. महिला बंदियों के लिए समर्पित व्यवस्था

​महिला बंदियों के लिए 198 की क्षमता वाली एक समर्पित महिला जेल का प्रस्ताव भेजा गया है, जिसके परिसर के भीतर दो ओपन बैरक भी शामिल होंगी.

​⚖️ उच्च न्यायालय के प्रमुख निर्देश

अदालत ने हजारीबाग, दुमका, रांची और जमशेदपुर के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के सचिवों को आदेश दिया है कि वे अपने मासिक निरीक्षण के दौरान चारों केंद्रीय जेलों में की जा रही वैकल्पिक व्यवस्थाओं (ओपन बैरकों) की जांच करें और अगली सुनवाई से पहले स्टेटस रिपोर्ट सौंपें. वहीं,  राज्य सरकार को भी इन सभी प्रस्तावों की प्रगति पर अगली सुनवाई तक अद्यतन (Status) रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है. इस मामले को अब 10 सितंबर 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है.

Share.
Next Story
सावन की भक्तिमय संध्या में रांची बनेगी शिवमय, 31 जोड़ों के साथ होगा भव्य रुद्राभिषेक, पहली बार सजेगी भजन जैमिंग संध्या
Exit mobile version