रांची: झारखंड पुलिस सिपाही भर्ती-2015 से जुड़े अभ्यर्थियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरण पूरे करने के बावजूद नियुक्ति से वंचित रहे पात्र अभ्यर्थियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर दस्तावेजों का सत्यापन पूरा कर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने और नियुक्ति-पत्र जारी करने का निर्देश दिया है।
शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम, AOR वात्सल्य विज्ञा समेत अन्य अधिवक्ताओं ने अपना पक्ष रखा।
छह याचिकाओं पर हुई एक साथ सुनवाई
इस भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों ने नियुक्ति से वंचित किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में छह अलग-अलग स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की थीं। इनमें जितेंद्र कुमार शर्मा व अन्य, महताब खान व अन्य, विष्णु कांत पांडेय व अन्य, प्रकाश कुमार पांडेय व अन्य, मिथिलेश कुमार महतो व अन्य और विशाल कुमार व अन्य की याचिकाएं शामिल थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी मामलों की एक साथ सुनवाई की और संबंधित अभ्यर्थियों को राहत देते हुए राज्य सरकार को नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।
7,272 पदों पर हुई थी भर्ती
पूरा मामला JSSC के विज्ञापन संख्या 04/2015 के तहत शुरू हुई झारखंड पुलिस सिपाही भर्ती से जुड़ा है। इस भर्ती के जरिए कुल 7,272 पदों पर नियुक्ति होनी थी।
अभ्यर्थियों का कहना था कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी 2,380 पद रिक्त रह गए। इनमें 1,168 महिला और 1,212 अन्य श्रेणी के पद शामिल थे।
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, कई अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा, शारीरिक परीक्षा, मेडिकल जांच और दस्तावेज सत्यापन सहित चयन प्रक्रिया के सभी जरूरी चरण पूरे कर लिए थे। इसके बावजूद दूसरी मेरिट लिस्ट जारी नहीं होने के कारण उन्हें नियुक्ति नहीं मिल सकी।
437 अभ्यर्थी PET में हुए शामिल
सुप्रीम कोर्ट के 3 जून 2026 के आदेश के अनुपालन में 437 अभ्यर्थियों ने 20 अगस्त 2026 को शारीरिक सहनशक्ति परीक्षा (PET) में हिस्सा लिया। वहीं, करीब 125 अन्य अभ्यर्थियों की सूची तैयार की जा रही थी, जिन्हें 21 अगस्त को PET में शामिल होना था।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 31 जुलाई 2026 के पत्र में निर्धारित मानदंड उसके 3 जून के आदेश के अनुरूप नहीं हैं। इसलिए संबंधित अभ्यर्थियों को पूर्ण रूप से उत्तीर्ण माना जाए।
करीब 300 होमगार्ड अभ्यर्थियों का मामला भी उठा
सुनवाई के दौरान करीब 300 होमगार्ड अभ्यर्थियों का मामला भी अदालत के सामने रखा गया। कोर्ट ने कहा कि रिक्त पद उपलब्ध हैं और इन अभ्यर्थियों ने संतोषजनक सेवा भी दी है। ऐसे में उनके समायोजन पर विचार किया जा सकता है।
अदालत ने यह भी कहा कि उनकी प्रारंभिक चयन प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाया जा सकता और उन्हें दोबारा लिखित परीक्षा में शामिल कराने का कोई औचित्य नहीं है।
चार सप्ताह में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि पात्र अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन पूरा कर चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जाए और नियुक्ति-पत्र जारी किए जाएं।
हालांकि, अदालत ने अपने आदेश की सीमा भी स्पष्ट कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह आदेश केवल इन याचिकाओं में शामिल अभ्यर्थियों पर लागू होगा। मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए पारित यह आदेश किसी अन्य मामले में बाध्यकारी नजीर (Binding Precedent) के रूप में लागू नहीं किया जाएगा।
इस निर्देश के साथ सुप्रीम कोर्ट ने सभी छह SLP और उनसे जुड़े लंबित आवेदनों का निपटारा कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद वर्ष 2015 की झारखंड पुलिस सिपाही भर्ती में नियुक्ति का इंतजार कर रहे संबंधित अभ्यर्थियों के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। अब राज्य सरकार को अदालत द्वारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर दस्तावेज सत्यापन और नियुक्ति की कार्रवाई पूरी करनी होगी।
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