Tuesday, September 22

रांची। कभी सारंडा और पारसनाथ के घने जंगलों में जिसका नाम सुनते ही सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर आ जाते थे, वही ₹1 करोड़ का इनामी भाकपा (माओवादी) का पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ सुनीर्मल उर्फ भास्कर उर्फ सागर उर्फ प्रधान अब सलाखों के पीछे है। तीन दशक तक माओवादी नेटवर्क का सबसे बड़ा रणनीतिकार माना जाने वाला ‘सागर’ इस बार जंगल की पगडंडियों पर नहीं, बल्कि एक साधारण टाटा मैजिक की सवारी के दौरान सुरक्षाबलों के शिकंजे में आ गया।

यह सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि झारखंड में माओवादी आंदोलन की रीढ़ पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार है।
खुफिया सूचना सटीक, चारों ओर घेराबंदी… और खत्म हुआ ‘ऑपरेशन सागर’
सूत्रों के अनुसार, धनबाद जिले के बरवाड़ा थाना क्षेत्र में मिसिर बेसरा अपने चार सहयोगियों के साथ ठिकाना बदलने के लिए टाटा मैजिक से गुजर रहा था। उसकी गतिविधियों की सटीक खुफिया सूचना पहले ही झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ को मिल चुकी थी। जैसे ही वाहन निर्धारित स्थान पर पहुंचा, संयुक्त टीम ने चारों ओर से घेराबंदी कर दी। कुछ ही मिनटों में वर्षों तक सुरक्षाबलों को चुनौती देने वाला शीर्ष माओवादी नेता हथकड़ी में था।
गिरफ्तार किए गए पांच नक्सलियों में शामिल हैं—
मिसिर बेसरा – पोलित ब्यूरो सदस्य (PBM)
तुम्बा मांझी – रीजनल कमेटी सदस्य (RCM)
बिरेन हांसदा – एरिया कमेटी सदस्य (ACM)
मंगल मुर्मू
दिनेश राय
वाहन से बरामद हुईं तीन AK-47 राइफलें
तलाशी के दौरान टाटा मैजिक से तीन AK-47 राइफलें बरामद की गईं। शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि माओवादी दल किसी नए सुरक्षित ठिकाने की ओर बढ़ रहा था। बरामद हथियार इस बात का संकेत हैं कि संगठन अब भी अपनी सशस्त्र क्षमता बचाए रखने की कोशिश कर रहा था।
जिसने जंगल को किला बनाया… वह अपने घर भी नहीं पहुंच सका
सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि जिस क्षेत्र के आसपास उसका पैतृक गांव है, उसी इलाके में उसकी सबसे बड़ी हार लिखी गई। वर्षों तक जंगलों को अपनी सुरक्षा कवच बनाने वाला ‘सागर’ इस बार खुफिया तंत्र की सटीक सूचना और सुरक्षाबलों की रणनीति के सामने टिक नहीं सका।
30 साल तक दहशत का दूसरा नाम
मिसिर बेसरा तीन दशक तक झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में माओवादी गतिविधियों का प्रमुख चेहरा रहा। उस पर सुरक्षा बलों पर हमले, हथियारों की सप्लाई, रंगदारी वसूली, संगठन विस्तार और कई बड़े नक्सली अभियानों की रणनीति तैयार करने के आरोप हैं। लंबे समय तक वह सुरक्षा एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में शीर्ष पर बना रहा।
पूछताछ से खुल सकते हैं संगठन के कई बड़े राज
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मिसिर बेसरा से पूछताछ में माओवादी संगठन के भूमिगत नेटवर्क, हथियारों की सप्लाई चेन, फंडिंग, शीर्ष नेतृत्व, सक्रिय कैडरों और कई पुराने नक्सली हमलों से जुड़े अहम खुलासे हो सकते हैं। इससे संगठन के बचे हुए ढांचे पर भी बड़ा असर पड़ने की संभावना है।
झारखंड के नक्सल विरोधी अभियान की ऐतिहासिक सफलता
एक समय सारंडा, पारसनाथ और झारखंड का बड़ा इलाका माओवादी प्रभाव का मजबूत गढ़ माना जाता था। आज वही संगठन अपने सबसे बड़े नेताओं को एक-एक कर खोता दिखाई दे रहा है। ₹1 करोड़ के इनामी पोलित ब्यूरो सदस्य की गिरफ्तारी को झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और केंद्रीय एजेंसियों के वर्षों तक चले समन्वित अभियान, मजबूत खुफिया तंत्र और लगातार दबाव का ऐतिहासिक परिणाम है।

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