रांची: डीएवी हेहल, रांची में आयोजित तीन दिवसीय साहित्यिक प्रतियोगिता ‘वाग्मी’ के दूसरे दिन भी विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला। 2 नवंबर से 4 नवंबर 2026 तक आयोजित इस प्रतियोगिता में विद्यार्थी अपनी साहित्यिक, रचनात्मक और भाषायी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। मंगलवार को प्रतियोगिता के दूसरे दिन काव्य पाठ, कथा वाचन और आशुभाषण जैसी गतिविधियों का आयोजन किया गया। इसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को साहित्य और भाषा के प्रति प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें अपनी अभिव्यक्ति क्षमता प्रदर्शित करने के लिए एक बेहतर मंच उपलब्ध कराना है। दूसरे दिन आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों ने अपनी कल्पनाशीलता, विचारों की मौलिकता और प्रस्तुति कौशल का परिचय दिया। मंच पर अपनी बात रखने से लेकर कविता और कहानी के माध्यम से भावनाओं को व्यक्त करने तक, विद्यार्थियों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ भागीदारी निभाई।
काव्य पाठ में दिखी भावों और शब्दों की खूबसूरत अभिव्यक्ति
काव्य पाठ प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने कविताओं के माध्यम से अपनी साहित्यिक रुचि और भावनात्मक अभिव्यक्ति का प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों ने कविता के भाव, शब्दों के चयन और उच्चारण पर विशेष ध्यान दिया। उनकी प्रस्तुतियों में आत्मविश्वास और विषय के प्रति समझ स्पष्ट दिखाई दी। कविता वाचन के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी आवाज के उतार-चढ़ाव और प्रभावशाली प्रस्तुति से श्रोताओं को प्रभावित किया।
वहीं, कथा वाचन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने कहानी कहने की कला का परिचय दिया। कहानी के पात्रों, घटनाओं और भावों को अपनी शैली में प्रस्तुत करते हुए प्रतिभागियों ने रचनात्मकता दिखाई। कहानी को रोचक अंदाज में प्रस्तुत करने के साथ-साथ स्पष्ट उच्चारण और संवाद शैली पर भी ध्यान दिया गया। इस प्रतियोगिता के जरिए विद्यार्थियों को अपनी कल्पनाशक्ति और कथन कौशल को निखारने का अवसर मिला।
आशुभाषण में त्वरित सोच और अभिव्यक्ति की परख
आशुभाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों के सामने तत्काल विचारों को व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करने की चुनौती रही। प्रतिभागियों ने मिले विषयों पर अपने विचार रखे और कम समय में प्रभावशाली ढंग से बात कहने की क्षमता दिखाई। इस प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों की त्वरित चिंतन क्षमता, भाषा पर पकड़ और मंच पर बोलने के आत्मविश्वास को परखा गया।
कार्यक्रम में भाषण और कहानी कथन जैसी गतिविधियों के माध्यम से भी विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिला। निर्णायक मंडली ने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का बारीकी से मूल्यांकन किया। इसमें स्पष्ट उच्चारण, आत्मविश्वास, विषय की समझ, विचारों की मौलिकता और प्रस्तुति के प्रभाव जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया गया। निर्णायकों ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें अपनी प्रतिभा को लगातार विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
व्यक्तित्व विकास में साहित्यिक गतिविधियों की अहम भूमिका
इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य ने कहा कि साहित्यिक प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसी गतिविधियों से बच्चों का भाषा कौशल, चिंतन क्षमता और आत्मविश्वास मजबूत होता है। साहित्य के प्रति रुचि विकसित होने के साथ-साथ विद्यार्थियों को अपनी छिपी हुई प्रतिभा सामने लाने का अवसर भी मिलता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों को अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने, नए विचारों को समझने और रचनात्मक तरीके से सोचने का अवसर मिलना भी जरूरी है। ‘वाग्मी’ जैसी प्रतियोगिताएं इसी दिशा में महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराती हैं।
प्रतियोगिता का दूसरा दिन साहित्यिक अभिरुचि, रचनात्मकता और उत्साह के माहौल में संपन्न हुआ। तीन दिवसीय आयोजन के अंतिम दिन 4 नवंबर को प्रतियोगिताओं के परिणाम घोषित किए जाएंगे। विद्यार्थियों के साथ-साथ विद्यालय परिवार को भी परिणामों का इंतजार है।
