Wednesday, November 4

रांची: झारखंड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन की मांग को लेकर मंगलवार को रांची में ‘जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाओ मार्च‘ निकाला गया। मार्च की अगुवाई राज्य के पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने की। इस दौरान झारखंड की नौ मान्यता प्राप्त जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को बचाने और उनके विकास के लिए ठोस सरकारी पहल करने की मांग उठाई गई।

मार्च के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए बंधु तिर्की ने कहा कि झारखंड में पांच जनजातीय और चार क्षेत्रीय भाषाएं आज हाशिये पर हैं। राज्य गठन के करीब 26 साल बीत जाने के बावजूद किसी भी सरकार ने इन नौ भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए बजट में विशेष प्रावधान नहीं किया है। उन्होंने कहा कि भाषाएं किसी भी समाज की पहचान, संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। ऐसे में इनके संरक्षण के लिए सरकार को गंभीरता से पहल करनी चाहिए।

नौ भाषाओं के विकास के लिए बने भाषा अकादमी

बंधु तिर्की ने झारखंड की नौ जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के विकास के लिए अलग भाषा अकादमी के गठन की मांग की। उन्होंने कहा कि भाषा अकादमी बनने से इन भाषाओं के अध्ययन, शोध, साहित्य, लेखन और प्रचार-प्रसार को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही इन भाषाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।

साल में कम से कम एक बार हो संवाद कार्यक्रम

पूर्व मंत्री ने सुझाव दिया कि सरकार को साल में कम से कम एक बार इन भाषाओं से जुड़े लोगों, साहित्यकारों, भाषा विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित करना चाहिए। इससे भाषाओं की मौजूदा स्थिति, चुनौतियों और उनके विकास की संभावनाओं पर चर्चा हो सकेगी।

बंधु तिर्की ने कहा कि आने वाले दिनों में झारखंड की नौ जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन से संबंधित एक विस्तृत दस्तावेज तैयार कर राज्य के मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा। इसके माध्यम से सरकार के सामने भाषा संरक्षण के लिए जरूरी सुझाव और मांगें रखी जाएंगी।

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