Thursday, September 10

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा से जुड़े बहुचर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई है। अब यह देखना बाकी है कि मधु कोड़ा दोषी साबित होते हैं या उन्हें क्लीन चिट मिलती है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट का फैसला सुरक्षित

रांची में सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रार्थी मधु कोड़ा और प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनी। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं द्वारा अपना-अपना पक्ष रखे जाने के बाद कोर्ट ने इस मामले पर फैसला सुरक्षित रखने का निर्णय लिया। मधु कोड़ा की ओर से अधिवक्ता नवीन कुमार सिंह ने पक्ष रखा, जबकि ईडी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने दलीलें पेश कीं।

निचली अदालत के फैसले को दी गई है चुनौती

पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मनी लॉन्ड्रिंग की राशि को लेकर उत्पन्न विवाद को चुनौती दी है। इससे पहले निचली अदालत यानी विशेष PMLA कोर्ट ने ईडी के आरोप पत्र (चार्जशीट) में दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग की राशि में संशोधन करने की उनकी अर्जी को खारिज कर दिया था। निचली अदालत के इसी आदेश के खिलाफ मधु कोड़ा ने हाईकोर्ट का रुख किया।

राशि को लेकर क्या है विवाद?

पूर्व मुख्यमंत्री का तर्क है कि ईडी द्वारा आरोप पत्र में दर्शाई गई मनी लॉन्ड्रिंग की कुल राशि और वास्तविक तथ्यों में भिन्नता है, जिसे संशोधित किया जाना चाहिए। हालांकि, ईडी ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि निचली अदालत का फैसला नियमों के अनुरूप है और जांच के आधार पर ही चार्जशीट तैयार की गई है। दोनों पक्षों की कानूनी बहसों को दर्ज करने के बाद अदालत अब अपना अंतिम आदेश सुनाएगी, जिस पर राज्य के राजनीतिक और कानूनी गलियारों की निगाहें टिकी हुई हैं।

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