रांची: रांची विश्वविद्यालय के 39वें दीक्षांत समारोह में सोमवार को शैक्षणिक उपलब्धियों और उत्कृष्टता का सम्मान किया गया। समारोह में विश्वविद्यालय के 58 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 71 गोल्ड मेडल प्रदान किए जा रहे हैं। वहीं, विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार दो शिक्षाविदों को मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित समारोह में झारखंड के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। हजारों विद्यार्थियों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों की मौजूदगी में दीक्षांत समारोह की औपचारिक शुरुआत की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। इसके बाद राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत प्रस्तुत किया गया। समारोह में संबोधन के बाद विद्यार्थियों को उपाधि और स्वर्ण पदक प्रदान करने का सिलसिला शुरू हुआ।
दो शिक्षाविदों को पहली बार मानद उपाधि
इस बार दीक्षांत समारोह में रांची विश्वविद्यालय की ओर से पहली बार दो शिक्षाविदों को मानद उपाधि प्रदान की गई। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने NIEPA की कुलपति प्रोफेसर डॉ. शशिकला बंजारी और लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. आलोक कुमार राय को मानद उपाधि से सम्मानित किया।
राज्यपाल ने कहा- दीक्षांत शिक्षा का अंत नहीं, नई शुरुआत है
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उपाधि और गोल्ड मेडल हासिल करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज का दिन विद्यार्थियों की मेहनत और लगन की उपलब्धि का दिन है। उनकी सफलता में अभिभावकों और शिक्षकों के योगदान को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि शिक्षा को जीवन में उतारने की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को ज्ञान देने के साथ तर्क करने और सवालों के जवाब तलाशने की क्षमता विकसित करता है, लेकिन अब जीवन की वास्तविक परिस्थितियां उनके सामने नई परीक्षा के रूप में आएंगी।
उन्होंने डिग्री और शिक्षा के बीच अंतर समझाते हुए कहा कि डिग्री यह बताती है कि विद्यार्थी ने क्या सीखा है, जबकि आगे का जीवन यह तय करेगा कि उस सीख का इस्तेमाल किस तरह किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों से ज्ञान के साथ विवेक और सफलता के साथ संवेदनशीलता को भी जीवन में जगह देने की अपील की।
सफलता में विनम्रता और असफलता में धैर्य की सीख
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को सफलता और असफलता दोनों के लिए तैयार रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जीवन हमेशा तय योजनाओं के मुताबिक नहीं चलता। कुछ फैसले सफलता तक पहुंचाते हैं, जबकि कुछ गलतियां सीखने का अवसर देती हैं। इसलिए सफलता के समय विनम्र और असफलता के समय धैर्यवान बने रहना जरूरी है।
उन्होंने रांची विश्वविद्यालय को झारखंड की शैक्षणिक यात्रा का महत्वपूर्ण संस्थान बताते हुए कहा कि किसी विश्वविद्यालय की पहचान सिर्फ इस बात से नहीं होती कि वहां से कितने विद्यार्थी डिग्री लेकर निकले, बल्कि इस बात से होती है कि उसके विद्यार्थी अपने विचार, शोध और सकारात्मक पहल के जरिए समाज में कितना योगदान देते हैं।
समारोह में रांची विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार, शिक्षक, अधिकारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे। 39वें दीक्षांत समारोह ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ विद्यार्थियों की मेहनत और उत्कृष्टता को सम्मान देने का मंच तैयार किया।
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