रांची: यह तस्वीर सिर्फ एक सड़क हादसे की नहीं, बल्कि उन अभिभावकों की चिंता की है जो हर सुबह अपने बच्चों को स्कूल बस में बैठाकर इस भरोसे के साथ भेजते हैं कि वे सुरक्षित वापस लौटेंगे। रांची में लगातार बारिश और तेज हवाओं के बीच शुक्रवार को AG मोड़ पर संत जेवियर स्कूल की चलती बस पर अचानक पेड़ गिर गया। बस में करीब 40 बच्चे सवार थे।
गनीमत रही कि पेड़ गिरने के बावजूद किसी बच्चे या स्कूल स्टाफ को चोट नहीं आई। लेकिन हादसे ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है – जब मौसम इतना खराब हो कि सड़कों पर पेड़ गिर रहे हों, रास्ते बाधित हो रहे हों और तेज हवाएं चल रही हों, तब बच्चों को स्कूल भेजना कितना सुरक्षित है?
बच्चों से भरी बस पर गिरा पेड़, बाल-बाल बची जान
शुक्रवार को AG मोड़ के पास संत जेवियर स्कूल की चलती बस अचानक हादसे का शिकार हो गई। तेज मौसम के बीच सड़क किनारे का पेड़ बस पर जा गिरा। उस वक्त बस में करीब 40 बच्चे मौजूद थे।
पेड़ गिरते ही आसपास के लोग मदद के लिए दौड़े। राहत की बात रही कि किसी बच्चे या बस स्टाफ को चोट नहीं आई। घटना के बाद रांची पुलिस और स्कूल प्रबंधन मौके पर पहुंचा और सड़क से पेड़ हटाने की कार्रवाई शुरू की गई।
लेकिन सवाल यह है कि अगर पेड़ बस के किसी संवेदनशील हिस्से पर गिरता या हादसे का असर थोड़ा भी ज्यादा होता तो क्या होता?
तीन दिनों में 100-115 MM बारिश, 40-50 KM की रफ्तार से चली हवा
पिछले तीन दिनों में रांची में करीब 100 से 115 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है। इसके साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चली हैं।
भारी बारिश और तेज हवा के कारण शहर के कई इलाकों में पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। जगह-जगह जलजमाव से जनजीवन प्रभावित हुआ है और तापमान में भी करीब 3 से 5 डिग्री तक गिरावट दर्ज की गई है।
ऐसे मौसम में सड़क पर निकलना पहले ही चुनौती बना हुआ है। इसके बावजूद स्कूल बसें बच्चों को लेकर सड़कों पर दौड़ रही हैं।
रांची से बोकारो तक मौसम का असर
यह सिर्फ AG मोड़ की घटना नहीं है। खराब मौसम का असर रांची से लेकर बोकारो तक कई जगह दिखाई दिया।
कांके-सुकुरहुट्टू रोड पर कैंसर हॉस्पिटल के पास पेड़ गिरने से सड़क बाधित हुई। वहीं कोकर इंडस्ट्रियल एरिया में भी पेड़ गिरने के कारण आवागमन प्रभावित रहा।
दूसरी ओर तेनुघाट-बोकारो नहर के चापी लोहा पुल के पास एक फॉर्च्यूनर गाड़ी नहर में जा घुसी। हालांकि इसमें सवार लोग सुरक्षित बच गए।
यानी बारिश और तेज हवा के कारण अलग-अलग इलाकों से हादसों और रास्ते बाधित होने की तस्वीर सामने आ रही है।
सवाल सिर्फ एक स्कूल का नहीं, बच्चों की सुरक्षा का है
AG मोड़ की घटना के बाद अभिभावकों की चिंता स्वाभाविक है। स्कूल जाने वाले बच्चे मौसम का आकलन खुद नहीं कर सकते। ऐसे में उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल और प्रशासन दोनों पर आती है।
जब शहर में पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आ रही हों, सड़कें पानी से प्रभावित हों और तेज हवाओं के कारण आवाजाही जोखिम भरी हो रही हो, तब बच्चों को सामान्य दिनों की तरह स्कूल भेजने के फैसले पर सवाल उठना लाजिमी है।
अभिभावकों के फोन ने बढ़ाई चिंता की तस्वीर
हादसे के बाद कई अभिभावकों ने बच्चों की स्थिति जानने के लिए झारखंड डिजिटल के कार्यालय में भी फोन किया। यह बताता है कि ऐसी घटनाओं का असर सिर्फ मौके पर मौजूद लोगों तक सीमित नहीं रहता।
जिस पल किसी माता-पिता को यह पता चले कि उनके बच्चे को लेकर जा रही बस पर पेड़ गिर गया है, उस पल की चिंता का अंदाजा लगाना मुश्किल है।
यहां सवाल किसी एक स्कूल या एक बस का नहीं है। सवाल उन तमाम बच्चों का है जो लगातार खराब मौसम के बीच रोज स्कूल आने-जाने के लिए सड़कों पर निकल रहे हैं।
अब रेनी-डे को लेकर फैसला कौन करेगा?
बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के असर से झारखंड में मौसम बदला हुआ है। बारिश और तेज हवाओं के बीच लगातार घटनाएं सामने आ रही हैं।
ऐसे में अभिभावकों की मांग और चिंता यही है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए खराब मौसम के दौरान स्कूल संचालन को लेकर स्पष्ट निर्णय लिया जाए।
रेनी-डे घोषित करना है या नहीं, इस पर अंतिम फैसला प्रशासन और संबंधित स्कूल प्रबंधन का होगा। लेकिन AG मोड़ पर बच्चों से भरी बस पर गिरा पेड़ यह सवाल जरूर छोड़ गया है कि क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बाद ही बच्चों की सुरक्षा पर फैसला लिया जाएगा?
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