स्वास्थ्य विभाग में बहने वाले भ्रष्टाचार के नाले में डुबकी लगाने वाले हर दिन नई बुलंदियों को छू रहे हैं. ताजा जानकारियां जो छनकर सामने आयी हैं उसके अनुसार एक दागी पदाधिकारी को प्रमोशन देकर सिवल सर्जन बना दिया गया है. दरअसल, वह दागी पदाधिकारी कुछ खास लोगों के खासे करीबी माने जाते हैं. यही कारण है कि उनकी परिक्रमा का फल विभाग के नेता और पदाधिकारियों ने उन्हें जल्द ही प्रदान कर दिया. हम बात कर रहे हैं सदर अस्पताल के नए सिविल सर्जन अमरेन्द्र प्रसाद की. विभाग में चर्चा तेज है कि उच्च पद पर बैठे एक खास पदाधिकारी की कृपा से अमरेन्द्र प्रसाद प्रमोशन पाकर सिविल सर्जन बने हैं. अमरेन्द्र प्रसाद पर पूर्व में मोबाइल मेडिकल यूनिट की राशि गबन करने के आरोप लग चुके हैं और इस मामले में उन्हें निलंबित किया जा चुका था.
क्या है मोबाइल मेडिकल यूनिट राशि गबन मामला
झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने मोबाइल मेडिकल यूनिट (चलंत चिकित्सा वाहन) मद की राशि के गबन के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए विभाग ने तत्कालीन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अनगड़ा) और सम्प्रति उपाधीक्षक (सदर अस्पताल, रामगढ़) डॉ. अमरेंद्र प्रसाद को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया था. 24 अप्रैल 2024 को जारी इस आदेश में अमरेन्द्र के खिलाफ कठोर शब्दों प्रयोग किया गया था. इस संबंध में विभाग के संयुक्त सचिव विद्यानंद शर्मा ‘पंकज’ के हस्ताक्षर से अधिसूचना जारी की गयी थी.
गबन में संलिप्तता के बाद कार्रवाई
जारी अधिसूचना के अनुसार, कतारी बागान (रांची) निवासी श्री सुनील कुमार महतो द्वारा मोबाइल मेडिकल यूनिट के नाम पर किए गए फर्जी निकासी संबंधी परिवाद पत्र के आलोक में यह कार्रवाई की गई थी. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय द्वारा डॉ. आर. एन. शर्मा (उप निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं) की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था.
जांच समिति की रिपोर्ट में बेलफेयर सोसाइटी ऑफ झारखंड द्वारा संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट वाहन (संख्या: JH01AG-9602) के माध्यम से 1 अप्रैल 2019 से 31 दिसंबर 2021 के बीच किए गए चिकित्सा कार्य के भुगतान राशि के गबन में डॉ. अमरेंद्र प्रसाद को प्रथम दृष्टया सहभागी (संलिप्त) पाया गया. इसके बाद झारखंड सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2016 के नियम-9 (1) (क) के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया.
विभागीय कार्रवाई की भी बात
निलंबन के साथ साथ अमरेन्द्र प्रसाद पर अलग से विभागीय कार्रवाई (Departmental Proceedings) शुरू करने के आदेश दिए गए थे. यहां यह भी विदित हो कि यह कार्रवाई विभागीय मंत्री के अनुमोदन के बाद झारखंड राज्यपाल के आदेश से प्रभावी की गई थी. विभाग में के कई मामले ऐसे हैं जो अजीबो गरीब हैं. लेकिन सबसे ज्यादा चर्चित राज्य का स्वास्थ्य विभाग रहा है. इस विभाग में आए दिन गड़बिड़यां सामने आती रहती हैं. राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अधीन जो सदर अस्पताल और रिम्स अस्पताल हैं उसके इन्फ्रास्टक्चर पर करोड़ों रुपयों फूंके जा रहे हैं लेकिन सच्चाई यह है कि राज्य के लोग इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं.
