Tuesday, September 22

नेमरा से भावनाओं का संदेश

दिशोम गुरु शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा का अनावरण

 

दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि पर नेमरा में आयोजित श्रद्धांजलि सभा उस समय भावुक हो उठी, जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने संबोधन के दौरान भावनाओं को रोक नहीं सके। 14 फीट ऊंची प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर उन्होंने कहा कि यह केवल उनके परिवार का नहीं, बल्कि पूरे झारखंड का ऐसा दुख है जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि जिस दिन दिशोम गुरु ने अंतिम सांस ली, उसी दिन झारखंड ने अपने सबसे बड़े जननायकों में से एक को खो दिया।
झारखंड आंदोलन के पुरोधा और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर मंगलवार को उनके पैतृक गांव नेमरा में श्रद्धा, सम्मान और संकल्प का संगम देखने को मिला। इस अवसर पर शिबू सोरेन की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित राज्य सरकार के कई मंत्री, विधायक और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने दिशोम गुरु के संघर्ष और योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन झारखंड की अस्मिता, जल-जंगल-जमीन और आदिवासी-मूलवासी अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक रहा है।

 

 

पिता की हत्या के बाद बाबा का पूरा जीवन जल, जंगल, जमीन और आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों की लड़ाई को समर्पित रहाः हेमंत सोरेन

अपने संबोधन के सबसे भावुक क्षण में मुख्यमंत्री ने अपने परिवार के दर्द को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि समारोह स्थल के पास ही उनके दादा की समाधि है, जिनकी असामाजिक तत्वों ने हत्या कर दी थी। उन्होंने कहा कि उस समय उनका जन्म भी नहीं हुआ था, लेकिन आज भी समाज में वैसी सोच रखने वाले लोग मौजूद हैं। इसलिए समाज को नफरत नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान और भाईचारे के रास्ते पर आगे बढ़ना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिशोम गुरु का पूरा जीवन जल, जंगल, जमीन और आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों की लड़ाई को समर्पित।

5 करोड़ की विकास योजनाओं की सौगात
इस अवसर पर आयोजित विकास मेला में मुख्यमंत्री ने करीब 5 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया। इन योजनाओं का उद्देश्य क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना और ग्रामीण विकास को गति देना है।
नेमरा में आयोजित इस कार्यक्रम ने श्रद्धांजलि के साथ विकास का संदेश भी दिया। बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने दिशोम गुरु की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट रहने का आह्वान

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज राज्य के कोने-कोने से लोग दिशोम गुरु को श्रद्धांजलि देने पहुंचे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने लोगों के दिलों में जो स्थान बनाया, वह आज भी अटूट है। उन्होंने कहा कि कुछ ताकतें समाज को बांटने और लोगों के बीच नफरत फैलाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन झारखंड की पहचान हमेशा एकता, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की रही है। ऐसे लोगों का जवाब केवल एकजुट होकर ही दिया जा सकता है। हेमंत सोरेन ने कहा कि नेमरा में स्थापित दिशोम गुरु की 14 फीट ऊंची प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को केवल एक महान नेता की याद नहीं दिलाएगी, बल्कि उन्हें झारखंड के संघर्ष, बलिदान और स्वाभिमान के इतिहास से भी परिचित कराएगी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को यह जानना जरूरी है कि आजादी के बाद भी इस क्षेत्र के लोगों ने शोषण और उपेक्षा झेली तथा अपने अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष किया।

 

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