Thursday, September 10

झारखंड में निवेश और रोजगार को नई रफ्तार देने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने टेक्सटाइल, परिधान एवं फुटवियर क्षेत्र के साथ-साथ औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन के लिए नई नीति लांच करने का फैसला किया है। पुरानी दोनों नीतियों की अवधि समाप्त होने के बाद अब इन्हें नए स्वरूप में पेश किया जाएगा। उद्योग विभाग इन नीतियों का मसौदा पहले ही जारी कर चुका है और हितधारकों से मिले सुझावों को इसमें शामिल किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक अगले पखवारे में इस नीति को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।

एक लाख करोड़ के निवेश और 25 हजार रोजगार का लक्ष्य

निवेशक अनुकूल नीतियों के माध्यम से राज्य में एक लाख करोड़ रुपये के निवेश आकर्षित करने की योजना है, जिससे 25 हजार से अधिक लोगों को रोजगार से जोड़ना है। इसके लिए झारखंड औद्योगिक एवं निवेश प्रोत्साहन नीति (जेआइआइपीपी) 2026 का मसौदा जारी किया गया है।

एमएसएमई और बड़े उद्योगों को मिलेगी बड़ी सब्सिडी

नई नीति में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को स्थिर पूंजी निवेश का 20 प्रतिशत (अधिकतम 15 करोड़ रुपये) सब्सिडी देने का प्रविधान है, जबकि गैर एमएसएमई इकाइयों को 25 प्रतिशत (अधिकतम 30 करोड़ रुपये) सब्सिडी दी जाएगी। एससी, एसटी, महिला एवं दिव्यांग उद्यमियों को पांच प्रतिशत अतिरिक्त लाभ मिलेगा। टेक्सटाइल क्षेत्र की योग्य इकाइयों को अधिकतम 50 करोड़ रुपये तक सब्सिडी और अधिकतम प्रभावी सब्सिडी 35 प्रतिशत तक हो सकती है।

पिछली नीति से सीख लेकर तैयार हुई नई पहल

प्रस्तावित टेक्सटाइल नीति 2016-2021 की वस्त्र नीति की अगली कड़ी है। पिछली पांच वर्षीय नीति के तहत राज्य में लगभग 500 से 1,000 करोड़ रुपये का निवेश आया था और 10,000 से 15,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए, जिसमें महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही।

रोजगार, कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा पर जोर

नीति में महिला कर्मचारियों को पुरुषों की तुलना में 1,000 रुपये अधिक मासिक वेतन सब्सिडी (पुरुष: 5,000 रुपये, महिला: 6,000 रुपये प्रति माह) का प्रविधान है। एससी/एसटी/दिव्यांग कर्मचारियों और पिछड़े जोन-3 जिलों में कार्यरत कर्मचारियों को भी अतिरिक्त 1,000 रुपये मिलेंगे। इसके अलावा पहले सात वर्षों में 100 प्रतिशत एसजीएसटी प्रतिपूर्ति, बिजली टैरिफ और स्टांप ड्यूटी में छूट जैसे प्रावधान भी शामिल हैं।

संताल परगना पर विशेष फोकस

नीति विशेष रूप से संताल परगना क्षेत्र के औद्योगिक विकास पर केंद्रित है, जो अब तक औद्योगिक गतिविधियों से दूर रहा है। राज्य के जिलों को तीन जोन में बांटा गया है और इसमें पहली बार पीएम मित्रा व अन्य केंद्रीय योजनाओं के साथ तालमेल बिठाया गया है।

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