Wednesday, November 4

अगर पड़ोसी ने आपके घर के दरवाजे, आने-जाने के रास्ते या निजी हिस्सों पर नजर रखने के लिए CCTV कैमरा लगाया है, तो यह निजता के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा के नाम पर किसी के निजी जीवन में दखल नहीं दिया जा सकता।

आजकल घरों, अपार्टमेंट और मोहल्लों में सुरक्षा के लिहाज से CCTV कैमरे लगाना आम हो गया है। चोरी, आपराधिक घटनाओं और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लोग अपने घरों के बाहर कैमरे लगाते हैं। लेकिन क्या कोई व्यक्ति अपने घर की सुरक्षा के नाम पर पड़ोसी के घर और उसकी गतिविधियों पर भी नजर रख सकता है? क्या किसी के घर के आने-जाने वाले रास्तों और वहां पहुंचने वाले लोगों की निगरानी करना कानूनी रूप से सही है? इस सवाल पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है।

हाईकोर्ट ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति निजी CCTV कैमरा इस तरह नहीं लगा सकता, जिससे पड़ोसी के रिहायशी परिसर की निजता प्रभावित हो। पड़ोसी के घर और उसकी निजी गतिविधियों की इस तरह निगरानी करना निजता के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।

पड़ोसी के CCTV कैमरे को लेकर पहुंचा था मामला

दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट में योगेंद्र मौर्य की ओर से दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई हो रही थी। याचिकाकर्ता का आरोप था कि उनके पड़ोसी ने अपने घर में ऐसा CCTV कैमरा लगाया है, जिससे उनके घर के आने-जाने के रास्ते भी कैमरे की निगरानी में आ रहे हैं। इस वजह से उनके घर आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियां भी रिकॉर्ड हो रही थीं।

याचिकाकर्ता ने इसे अपनी और अपने परिवार की निजता में हस्तक्षेप बताते हुए अदालत के सामने अपना पक्ष रखा। उनका कहना था कि किसी दूसरे व्यक्ति को उनके घर आने-जाने वाले लोगों पर इस तरह नजर रखने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ ने क्या कहा?

इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने की। पीठ ने कहा कि किसी पड़ोसी के रिहायशी परिसर की इस तरह निगरानी करना उसके निजता के अधिकार का उल्लंघन होगा। निजी सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे लगाने का अधिकार किसी व्यक्ति को दूसरे के निजी जीवन में अनावश्यक हस्तक्षेप करने की छूट नहीं देता।

अदालत की इस टिप्पणी से यह स्पष्ट होता है कि CCTV कैमरा लगाने का उद्देश्य सुरक्षा होना चाहिए, न कि पड़ोसी के घर की गतिविधियों पर नजर रखना।

भारतीय संविधान भी देता है निजता का अधिकार

भारत में निजता का अधिकार मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2017 में के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए निजता के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा माना था।

इसका अर्थ है कि किसी व्यक्ति को अपने निजी जीवन, परिवार और घर की गरिमा बनाए रखने का अधिकार है। केवल अपने घर की दीवार पर कैमरा लगा लेने से किसी व्यक्ति को दूसरे के निजी जीवन की निगरानी करने का असीमित अधिकार नहीं मिल जाता।

क्या पड़ोसी के खिलाफ की जा सकती है शिकायत?

अगर आपके पड़ोसी का CCTV कैमरा आपके घर के दरवाजे, खिड़की, निजी आंगन या आने-जाने के रास्ते को लगातार रिकॉर्ड कर रहा है, तो आप इस संबंध में पुलिस या संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर सकते हैं। कैमरे की दिशा और रिकॉर्डिंग से जुड़े सबूत सुरक्षित रखना भी उपयोगी हो सकता है।

हालांकि, हर ऐसा CCTV कैमरा गैरकानूनी नहीं है जो किसी सार्वजनिक रास्ते या साझा प्रवेश द्वार को रिकॉर्ड करता हो। कैमरे का एंगल, रिकॉर्डिंग का उद्देश्य और उससे पड़ने वाला निजता पर प्रभाव जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर मामला तय किया जाएगा।

 

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