Wednesday, November 4

अमेरिका से UAE तक भारतीयों की बढ़ती मौजूदगी, विदेशों में 3.4 करोड़ से ज्यादा भारतीय मूल के लोग और प्रवासी भारतीय; बेहतर नौकरी, कमाई, शिक्षा और जीवनशैली की तलाश में देश छोड़ रहे लोग

बेहतर नौकरी, ज्यादा कमाई, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर भविष्य की उम्मीद में भारतीयों का विदेशों की ओर रुझान लगातार चर्चा में है। कभी रोजगार और कारोबार के लिए मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगरों को पहली पसंद माना जाता था, लेकिन अब बड़ी संख्या में भारतीय दूसरे देशों में भी अपना भविष्य तलाश रहे हैं। कोई अमेरिका में तकनीकी क्षेत्र में करियर बना रहा है, तो कोई कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के बाद नौकरी की संभावनाएं तलाश रहा है। वहीं खाड़ी देशों में लाखों भारतीय रोजगार और कारोबार से जुड़े हुए हैं।

विदेश मंत्रालय के जनवरी 2025 के देशवार आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के अलग-अलग देशों में करीब 3.44 करोड़ प्रवासी भारतीय (Overseas Indians) रह रहे थे। इनमें भारतीय नागरिक यानी NRI और भारतीय मूल के वे लोग यानी PIO शामिल हैं, जिन्होंने दूसरे देशों की नागरिकता हासिल कर ली है। यह आंकड़ा बताता है कि भारतीय समुदाय की मौजूदगी अब दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

आखिर किन देशों में रह रहे हैं सबसे ज्यादा भारतीय?

विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, विदेशों में रहने वाले भारतीयों की संख्या के मामले में अमेरिका सबसे आगे है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कनाडा, मलेशिया और सऊदी अरब जैसे देश प्रमुख स्थान पर हैं।

1. अमेरिका – 56.93 लाख भारतीय

अमेरिका भारतीय समुदाय की सबसे बड़ी आबादी वाला प्रमुख देश है। यहां लगभग 56.93 लाख भारतीय मूल के लोग और भारतीय नागरिक रहते हैं। इनमें करीब 37.75 लाख भारतीय मूल के लोग और 19.18 लाख NRI शामिल हैं। तकनीक, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, वित्त और उच्च शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भारतीयों की अच्छी भागीदारी है। सिलिकॉन वैली समेत कई बड़े तकनीकी केंद्रों में भारतीय पेशेवर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

2. संयुक्त अरब अमीरात – 38.97 लाख भारतीय

UAE भारतीयों के लिए रोजगार के सबसे महत्वपूर्ण विदेशी केंद्रों में से एक है। यहां लगभग 38.97 लाख भारतीय रहते हैं। इनमें करीब 38.90 लाख NRI हैं। दुबई और अबू धाबी जैसे शहरों में भारतीय निर्माण, व्यापार, होटल, परिवहन, बैंकिंग, स्वास्थ्य और सेवा क्षेत्र में काम करते हैं। भारत के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध और रोजगार के अवसर इसे भारतीय कामगारों के लिए आकर्षक बनाते हैं।

3. कनाडा – 36.11 लाख भारतीय

कनाडा भी भारतीयों के पसंदीदा विदेशी ठिकानों में शामिल है। यहां लगभग 36.11 लाख भारतीय मूल के लोग और NRI रहते हैं। शिक्षा, आईटी, स्वास्थ्य सेवा, कारोबार और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में भारतीयों की अच्छी मौजूदगी है। उच्च शिक्षा और स्थायी निवास की संभावनाओं ने भी लंबे समय तक कनाडा को भारतीय युवाओं के बीच लोकप्रिय बनाया है। हालांकि, हाल के वर्षों में वहां की आव्रजन नीतियों में बदलाव के कारण छात्रों और नए प्रवासियों के सामने चुनौतियां भी बढ़ी हैं।

4. मलेशिया – 29.35 लाख भारतीय

मलेशिया में करीब 29.35 लाख भारतीय रहते हैं। यहां भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी कई पीढ़ियों से रह रही है। व्यापार, शिक्षा, उद्योग और सेवा क्षेत्र में भारतीय समुदाय की मौजूदगी है। मलेशिया और भारत के बीच ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक संबंध भी इस समुदाय को विशेष पहचान देते हैं।

5. सऊदी अरब – 27.47 लाख भारतीय

सऊदी अरब में लगभग 27.47 लाख भारतीय रहते हैं। यहां भारतीय मुख्य रूप से निर्माण, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य, तकनीकी सेवाओं, व्यापार और अन्य रोजगार क्षेत्रों से जुड़े हैं। बड़ी संख्या में भारतीय कामगार यहां नौकरी के लिए जाते हैं और अपनी कमाई का एक हिस्सा भारत में परिवारों को भेजते हैं।

इनके अलावा इन देशों में भी है भारतीयों की बड़ी आबादी

विदेश मंत्रालय के आंकड़ों में कई अन्य देश भी शामिल हैं, जहां भारतीय समुदाय की मजबूत मौजूदगी है।

देश भारतीयों की अनुमानित संख्या
श्रीलंका 16.07 लाख
दक्षिण अफ्रीका 13.92 लाख
ब्रिटेन 13.39 लाख
कुवैत 10.10 लाख
ऑस्ट्रेलिया 9.76 लाख
मॉरीशस 8.97 लाख
ओमान 6.62 लाख
कतर 8.30 लाख

ये आंकड़े भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों को मिलाकर तैयार किए गए हैं। इनमें कई देशों में पीढ़ियों से रह रहे भारतीय मूल के परिवार भी शामिल हैं।

आखिर क्यों विदेशों की तरफ बढ़ रहा है भारतीयों का रुझान?

विदेश जाने के पीछे हर व्यक्ति की अपनी वजह होती है। कोई अच्छी नौकरी के लिए देश छोड़ता है, तो कोई बच्चों की बेहतर शिक्षा और परिवार के भविष्य के लिए दूसरे देश में बसने का फैसला करता है। इसके कुछ प्रमुख कारण हैं।

1. बेहतर वेतन और रोजगार के अवसर

कई विदेशी देशों में तकनीक, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, वित्त और निर्माण जैसे क्षेत्रों में कुशल पेशेवरों की मांग रहती है। बेहतर वेतन और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में काम करने का अवसर युवाओं को आकर्षित करता है।

2. उच्च शिक्षा और करियर की संभावनाएं

अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में उच्च शिक्षा के लिए भारतीय छात्र बड़ी संख्या में जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय डिग्री, शोध और पढ़ाई के बाद नौकरी की संभावनाएं उनके फैसले को प्रभावित करती हैं। हालांकि, विदेश में पढ़ाई के बाद नौकरी या स्थायी निवास मिलना सुनिश्चित नहीं होता।

3. बेहतर जीवनशैली और सुविधाएं

कुछ लोग बेहतर सार्वजनिक परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा, साफ-सफाई और व्यवस्थित शहरी सुविधाओं की उम्मीद में विदेश जाते हैं। परिवार के लिए सुरक्षित और बेहतर वातावरण भी एक कारण हो सकता है।

4. कारोबार और निवेश के अवसर

दुबई, सिंगापुर, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में भारतीय कारोबारी व्यापार, स्टार्टअप और निवेश के अवसर तलाशते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच और बड़े ग्राहक समूह भी उन्हें आकर्षित करते हैं।

5. परिवार के साथ रहने की इच्छा

कई भारतीयों के परिवार पहले से विदेशों में रहते हैं। ऐसे में नौकरी, शादी या पारिवारिक पुनर्मिलन के कारण लोग भी दूसरे देशों में जाकर बसने का फैसला करते हैं।

क्या विदेश जाना ही बेहतर भविष्य की गारंटी है?

विदेश में नौकरी या पढ़ाई करना हर किसी के लिए आसान नहीं है। वीजा नियम, रहने का खर्च, महंगी शिक्षा, स्वास्थ्य बीमा, भाषा और सांस्कृतिक अंतर जैसी चुनौतियां भी सामने आती हैं। कई देशों में आव्रजन नियम सख्त होने से स्थायी निवास हासिल करना भी पहले की तुलना में कठिन हो सकता है।

दूसरी ओर, भारत में भी आईटी, स्टार्टअप, वित्त, स्वास्थ्य, विनिर्माण और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में रोजगार और कारोबार के अवसर बढ़ रहे हैं। ऐसे में विदेश जाने का फैसला व्यक्ति की योग्यता, आर्थिक स्थिति, करियर और भविष्य की योजनाओं पर निर्भर करता है।

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े भी दिखाते हैं भारतीयों का विदेशों में बढ़ता फैलाव

संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय प्रवासी स्टॉक 2024 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में जन्मे करीब 1.85 करोड़ लोग दूसरे देशों में रह रहे थे। इनमें संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका प्रमुख गंतव्य थे। संयुक्त राष्ट्र का यह आंकड़ा विदेश मंत्रालय के आंकड़ों से अलग है, क्योंकि इसमें मुख्य रूप से भारत में जन्मे प्रवासियों की गणना होती है, जबकि विदेश मंत्रालय भारतीय मूल के लोगों को भी शामिल करता है।

यह अंतर समझना जरूरी है। विदेश में रहने वाले सभी भारतीय मूल के लोग हाल के वर्षों में भारत से जाकर नहीं बसे हैं। कई देशों में भारतीय समुदाय की जड़ें कई पीढ़ियों पुरानी हैं।

 

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