मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ज्ञानेश कुमार ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मंजूरी के बिना निर्वाचन आयोग के नाम पर कुछ फैसले लिए।
वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने इस मामले का उल्लेख किया और जल्द सुनवाई के लिए इसे सूचीबद्ध करने की मांग की।
याचिका में क्या कहा गया?
विकास सिंह ने अदालत के सामने दलील दी कि बहु-सदस्यीय आयोग में फैसले सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर लिए जाने चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की पूरी प्रक्रिया को लेकर क्या निर्वाचन आयोग ने सामूहिक रूप से कोई फैसला लिया था।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि यदि आयोग के सभी सदस्यों की सहमति या बहुमत से फैसला नहीं लिया गया, तो SIR से जुड़े फैसले को निर्वाचन आयोग का सामूहिक निर्णय मानने को लेकर सवाल उठता है।
SIR के फैसले पर भी उठाया सवाल
वकील ने सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने भी संबंधित कार्रवाई को निर्वाचन आयोग के फैसले के आधार पर माना है। ऐसे में आयोग के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल महत्वपूर्ण हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई करने पर सहमति जताई है। मामले में अदालत की सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि याचिका में उठाए गए सवालों पर कोर्ट का क्या रुख रहता है।
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