Tuesday, September 22

चाईबासा/रांची: कभी माओवादी गतिविधियों का मजबूत केंद्र माने जाने वाले सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के बीच अब संगठन के बड़े चेहरों के हथियार छोड़ने का सिलसिला दिखाई दे रहा है। 10 लाख रुपये के इनामी माओवादी कमांडर सालूका कायम के आत्मसमर्पण को इसी बदलती तस्वीर की एक अहम कड़ी माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक सालूका के साथ उसकी पत्नी पिंकी और कोदोमुनी कोड़ा ने भी आत्मसमर्पण किया है।

सालूका कायम लंबे समय से पश्चिमी सिंहभूम के सोनुवा, गोइलकेरा और सारंडा-कोल्हान क्षेत्र में सक्रिय माओवादी नेटवर्क से जुड़ा रहा है। 2025 में पुलिस की कार्रवाई और विभिन्न रिपोर्टों में उसका नाम प्रतिबंधित CPI (Maoist) के सक्रिय वरिष्ठ नेताओं और कमांडरों में शामिल रहा था।

2026 में भी 10 लाख का था इनाम

मई 2026 की रिपोर्ट में सालूका कायम को सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट क्षेत्र में सक्रिय 10 लाख रुपये के इनामी नक्सलियों में शामिल बताया गया था। उसी रिपोर्ट में कोदोमुनी कोड़ा का नाम भी इनामी नक्सलियों की सूची में था। इससे स्पष्ट है कि दोनों सुरक्षा एजेंसियों की नजर में महत्वपूर्ण माओवादी नेटवर्क का हिस्सा रहे हैं।

सालूका के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पहले भी तेज रही है। अप्रैल 2025 में उसके घर पर पुलिस ने इश्तेहार चस्पा कर उसे आत्मसमर्पण करने या गिरफ्तारी के लिए प्रस्तुत होने की चेतावनी दी थी। पुलिस के अनुसार वह लंबे समय से फरार चल रहा था और उसके खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज थे।

सारंडा में लगातार बढ़ा सुरक्षा बलों का दबाव

सारंडा और कोल्हान के जंगल लंबे समय से माओवादी गतिविधियों के लिहाज से बेहद संवेदनशील रहे हैं। घने जंगल और दुर्गम पहाड़ी इलाका माओवादियों को छिपने और अपने दस्ते को संचालित करने में मदद करता रहा है। लेकिन पिछले वर्षों में सुरक्षा बलों ने संयुक्त अभियान, खुफिया तंत्र और जंगलों के भीतर सुरक्षा उपस्थिति को लगातार मजबूत किया है।

सितंबर 2025 में चाईबासा में 10 माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद पुलिस ने भी कहा था कि सुरक्षा अभियानों और नए सुरक्षा कैंपों के कारण पश्चिमी सिंहभूम में माओवादी प्रभाव का दायरा लगातार सिमट रहा है।

2026 में भी कोल्हान-सारंडा क्षेत्र में सुरक्षा अभियान जारी रहे। मई 2026 की रिपोर्ट में बताया गया कि मुठभेड़ों और घेराबंदी के बाद पांच लाख के इनामी नक्सली सागेन अंगरिया के आत्मसमर्पण की संभावना भी सामने आई थी।

सालूका का सरेंडर क्यों महत्वपूर्ण?

सालूका कायम जैसे इनामी और लंबे समय से सक्रिय कमांडर का हथियार छोड़ना केवल एक व्यक्ति के आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं है। इसका असर माओवादी संगठन के स्थानीय नेटवर्क और उसके मनोबल पर भी पड़ सकता है।

सारंडा का जंगल आज भी भौगोलिक रूप से उतना ही दुर्गम है, लेकिन वहां सुरक्षा बलों की पहुंच और लगातार अभियानों ने माओवादी गतिविधियों के लिए उपलब्ध सुरक्षित क्षेत्र को पहले की तुलना में सीमित किया है। यही वजह है कि आत्मसमर्पण की घटनाओं को सुरक्षा एजेंसियां माओवादी प्रभाव के कमजोर होने के संकेत के तौर पर देखती हैं।

सालूका कायम का आत्मसमर्पण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जिस क्षेत्र में वह लंबे समय तक सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बना रहा, वहीं अब उसके हथियार डालने की खबर सामने आई है। सारंडा का जंगल वही है, लेकिन वहां शक्ति संतुलन बदलता हुआ दिखाई दे रहा है।

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